अनाड़ी देवर को भाभी ने चोदना सिखाया – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Devar bhabhi sex story, bhabhi ki tight kuwari gand sex story, Virgin anal sex story: यह उस समय की बात है जब मैं बीस साल का था, तब मैं लॉ की पढ़ाई कर रहा था। मेरे माता-पिता बहुत धार्मिक विचारों के थे, हमेशा पूजा-पाठ और धर्म-कर्म में लगे रहते थे। घर में हम दो भाई और एक बहन थे, बहन की शादी हो चुकी थी। मेरे बड़े भैया का रेडीमेड कपड़ों का अच्छा-खासा कारोबार था, जिसके चलते वे अक्सर दूसरे शहरों में टूर पर जाते रहते थे, कभी हफ्ते भर तो कभी दस-बारह दिन। भैया की शादी को अभी सिर्फ एक साल ही हुआ था, और मेरी भाभी घर में आकर सबकी चहेती बन गई थीं। वे मुझसे बहुत स्नेह रखती थीं, क्योंकि घर में बात करने वाला बस मैं ही था, खासकर तब जब भैया बाहर होते। भाभी मुझे प्यार से लल्ला या लाला कहकर बुलातीं, और मैं भी उनके पास रहना बहुत पसंद करता था, क्योंकि वे घर को इतना जीवंत बना देती थीं कि अकेलापन कभी महसूस ही नहीं होता।

भाभी की खूबसूरती का क्या कहना, एकदम गोरी-चिट्टी, लंबे-लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते, कद करीब पांच फुट पांच इंच का, और जिस्म का कटाव ३८-२४-३८, जो किसी को भी मोहित कर दे। उनकी चूचियां इतनी गर्व से उठी हुई कि ब्लाउज में भी पूरी तरह छुप नहीं पातीं, और मैं तो हमेशा उनकी एक झलक पाने को बेताब रहता। जब वे काम करतीं, जैसे झाड़ू लगातीं या बर्तन धोतीं, तो कभी आंचल सरक जाता या वे नीचे झुकतीं, तो उनकी चूचियों की दरार नजर आ जाती, और मैं चुपके से देखता रहता। भाभी को शायद इसका अंदाजा था, क्योंकि कभी-कभी वे जानबूझकर मुझे थोड़ा और नजारा दे देतीं, जैसे हंसते हुए आंचल संभालतीं लेकिन देर से।

यह सब तब शुरू हुआ जब भैया शादी के बाद पहली बार लंबे टूर पर गए। मां-बाप पहले से ही हरिद्वार तीर्थयात्रा पर निकल चुके थे, करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे। घर की सारी जिम्मेदारी भाभी पर आ गई थी, खाना बनाना, सफाई, सब कुछ। भैया ने जाते हुए मुझे सख्त हिदायत दी कि घर पर रहकर पढ़ाई करो, क्योंकि मेरे इम्तिहान नजदीक थे, और साथ ही भाभी को अकेला महसूस न होने दो। मैंने हामी भरी, लेकिन मन ही मन खुश था, क्योंकि भाभी के साथ ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिलेगा। अगले दिन सुबह दस बजे की बस से भैया चले गए, हम दोनों उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने गए थे। रास्ते में भाभी कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थीं, बार-बार मुस्कुरातीं, जैसे कोई राज हो उनके पास। घर लौटते ही उन्होंने मुझे अपने कमरे में बुलाया, दरवाजा बंद किया और बोलीं, “लाला, मुझे अकेले सोने की आदत नहीं है, रातें बहुत लंबी लगती हैं। जब तक तुम्हारे भैया वापस नहीं आते, तुम मेरे कमरे में ही सोया करो, और अपनी किताबें भी यहीं ले आओ, पढ़ाई भी साथ में हो जाएगी।”

मैं तो जैसे आसमान में उड़ने लगा, लेकिन बाहर से शांत रहते हुए बोला, “ठीक है भाभी, जैसा आप कहें।” फटाफट मैंने अपनी स्टडी टेबल और किताबें उनके कमरे में शिफ्ट कर दीं। भाभी ने दोपहर का खाना बनाया, हम दोनों ने साथ बैठकर खाया। उस दिन वे मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थीं, खाना परोसते हुए बार-बार मेरे कंधे को छूतीं, हंसतीं, और किसी न किसी बहाने से अपनी चूचियों का नजारा दिखातीं, जैसे झुककर सब्जी डालतीं तो ब्लाउज की गहराई साफ नजर आती। खाने के बाद उन्होंने मुझे संतरा दिया, संतरा देते हुए उनका हाथ मेरे हाथ पर रुका, उन्होंने धीरे से मसल दिया और मादक अदा से मुस्कुराईं। मैं शर्मा गया, दिल तेज धड़कने लगा, क्योंकि उस मुस्कान में शरारत थी, कुछ अलग। फिर मैं पढ़ने बैठ गया, और भाभी कपड़े बदलने लगीं।

गर्मी के दिन थे, हवा गर्म थी, मैंने शर्ट और बनियान उतार दी, सिर्फ पैंट में बैठा पढ़ रहा था। टेबल के ऊपर दीवार पर लगा शीशा था, जिसमें भाभी की हर हरकत नजर आ रही थी। वे मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थीं, धीरे-धीरे ब्लाउज के हुक खोल रही थीं, ब्लाउज उतरा तो लेस वाली ब्रा में बंधी उनकी विशाल चूचियां नजर आईं, ब्रा इतनी टाइट कि चूचियां आधी बाहर झांक रही थीं, गोरा मांस उभरा हुआ। मैं पहली बार इतने करीब से देख रहा था, दिल की धड़कन तेज हो गई। फिर उन्होंने साड़ी का पल्लू गिराया, पेटीकोट का नाड़ा खोला, और धीरे से नीचे सरका दिया। अब वे सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, उनकी गोरी जांघें चमक रही थीं, चूतड़ गोल-गोल, जैसे किसी मूर्ति की तरह। वे सोच भी नहीं रही थीं कि मैं शीशे से सब देख रहा हूं। फिर वे बिस्तर पर चित्त लेट गईं, चुन्नी से सीने को ढका, लेकिन थोड़ी देर में सांसों के साथ चुन्नी सरक गई, और उनकी चूचियां पूरी नजर आने लगीं, निप्पल ब्रा से बाहर झांकते। मैं पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था, बार-बार शीशे में देखता। रात के बारह बज चुके थे, मैंने किताब बंद की, बत्ती बुझाने लगा, तभी भाभी की सुरीली आवाज आई, “लाला… यहां आओ ना…”

मैं उनके पास गया, वे अब चुन्नी ठीक कर चुकी थीं। मैंने पूछा, “क्या हुआ भाभी?” वे बोलीं, “लाला, जरा मेरे पास ही लेट जाओ ना, थोड़ी देर बातें करेंगे, फिर तुम अपने बिस्तर पर चले जाना।” मैं हिचकिचाया, लेकिन उनके बिस्तर पर लेट गया। मैं लुंगी पहनकर सोता था, पैंट में असहज लग रहा था। भाभी ने भांप लिया, बोलीं, “अरे, कोई बात नहीं, पैंट उतार दो, जैसे रोज सोते हो वैसे ही लेट जाओ, शरमाओ मत लाला, मैं तुम्हारी भाभी हूं।” मैंने लाइट बंद की, नाइट लैंप जलाया, लुंगी पहनी और उनके बगल में लेट गया। उनका बदन इतना पास कि गर्माहट महसूस हो रही थी, ब्रा से आधी चूचियां बाहर, क्या हसीन नजारा। भाभी बोलीं, “इतने महीनों से अकेले नहीं सोई, अब आदत नहीं है लाला, तुम्हारे भैया के बिना रातें काटना मुश्किल लगता है।”

मैंने कहा, “मैं भी कभी किसी के साथ नहीं सोया भाभी।” वे जोर से खिलखिलाईं, “अरे वाह, तो जब मौका मिले अनुभव ले लेना चाहिए ना, बाद में काम आएगा, है ना लाला?” इतना कहकर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी चूचियों पर रख दिया। मैं सिहर उठा, लेकिन हाथ रखा रहा। वे बोलीं, “मुझे यहां कुछ खुजली हो रही है लाला, जरा सहलाओ ना…” मैंने ब्रा के ऊपर से सहलाना शुरू किया, उनका मांस मुलायम, गर्म। उन्होंने मेरा हाथ ब्रा के अंदर ठेल दिया, “अंदर से सहलाओ ना…” मैंने पूरा हाथ अंदर डाला, जोर-जोर से मसलने लगा, निप्पल कड़े हो गए, “आह… ऐसे ही लाला, अच्छा लग रहा है…” ब्रा से दिक्कत हो रही थी, वे पीठ मेरी तरफ घुमाकर बोलीं, “हुक खोल दो ना, ठीक से करो…” मैंने कांपते हाथों से हुक खोला, उन्होंने ब्रा उतार फेंकी। अब नंगी चूचियां मेरे हाथों में, मैं कसकर दबाने लगा, “ओह्ह लाला, थोड़ा कसकर दबाओ… हां, ऐसे… क्या मस्त चूचियां हैं ना मेरी, पहली बार छू रहे हो किसी की?”

मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा, अंडरवियर से बाहर आने को बेताब, उनकी जांघ पर रगड़ लगने लगा। वे बोलीं, “लाला, मेरी टांगों में क्या चुभ रहा है इतना कड़ा?” मैंने हिम्मत करके कहा, “यह मेरा हथियार है भाभी, तुमने भैया का तो देखा होगा ना?” वे मुस्कुराईं, “हाथ लगाकर देखूं? चलो दिखाओ अपना हथियार…” और बिना इंतजार किए अंडरवियर में हाथ डाला, लंड पकड़ लिया, कसकर मसलने लगीं, “बाप रे, कितना कड़क और मोटा है लाला, सुपारा तो जैसे लोहे का… कहां छुपा रखा था इतने दिन?” मैंने कहा, “यहीं तो था भाभी, लेकिन तुमने कभी ध्यान नहीं दिया।” वे बोलीं, “मुझे क्या पता था कि मेरे देवर का लौड़ा इतना बड़ा होगा, छोटे भाई का लौड़ा बड़े भाई से भी बड़ा, वाह रे… अब तो इसे मसलकर मजा लूंगी।” उन्होंने लंड को मुट्ठी में बंद किया, ऊपर-नीचे करने लगीं, फिर पेटीकोट ऊपर उठाया, मेरे लंड को जांघों के बीच दबाया, रगड़ने लगीं। उनकी चूची मेरे मुंह के पास, उन्होंने ठेल दी, “चूसो लाला, मुँह में लेकर चूसो मेरी चूचियां… हां, ऐसे जोर से… आह… ओह्ह… स… स… अच्छा लग रहा है…”

मैंने उनकी बाईं चूची मुंह में भरी, जीभ से निप्पल घुमाया, चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने कहा, “भाभी, मैं हमेशा तुम्हारे ब्लाउज में इन कसी हुई चूचियों को देखता था, दिल करता था छू लूं, चूस लूं, लेकिन डरता था कहीं नाराज न हो जाओ…” वे बोलीं, “अच्छा, तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो लाला, जी भरकर दबाओ, चूसो, मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं, जैसा चाहो वैसा करो मेरे साथ, अपनी भाभी को खुश कर दो…” मैं उनकी चूचियों पर टूट पड़ा, बारी-बारी चूसता, दबाता, काटता, वे सिसकारियां भरतीं, “आह… ओह्ह… हां लाला… और जोर से… उईई… मेरी चूचियां तेरे लिए ही हैं… मसल इन्हें… स… स… आह्ह…”टांग मेरी कमर पर चढ़ी, लंड उनकी झांटों पर रगड़ लगने लगा, चूत की मुलायमाहट महसूस हुई, पैंटी नहीं थी। मेरा सब्र टूट रहा था।

मैं बोला, “भाभी, मुझे कुछ हो रहा है, मैं अपने आप में नहीं हूं, प्लीज बताओ क्या करूं?” वे बोलीं, “तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है लाला?” मैंने कहा, “नहीं भाभी…” वे हंसीं, “कितने दुख की बात, कोई लड़की इसे देखकर मना कैसे कर सकती, शादी तक ऐसे ही रहोगे क्या?” मैं चुप रहा। उन्होंने मेरा मुंह अपने मुंह से सटाया, फुसफुसाईं, “अपनी भाभी को चोदोगे लाला?” मैं कांपते हुए बोला, “क्यों नहीं भाभी…” वे मुस्कुराईं, “ठीक है, अपने अनाड़ी देवर को मुझे ही सब सिखाना पड़ेगा, लेकिन गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना… चलो, चड्डी उतारो, पूरी तरह नंगे हो जाओ…” मैंने चड्डी उतारी, नंगा खड़ा हो गया, लंड तना हुआ। भाभी ने पेटीकोट उतारा, पूरी नंगी हो गईं, टांगें फैलाईं, झांटों के बीच रसीली गुलाबी चूत नजर आई, चमक रही थी। वे बोलीं, “आओ मेरे ऊपर…” मैं उनके ऊपर लेट गया, चूचियां दबाते हुए होंठ चूसने लगा, जीभ उनकी जीभ से लड़ने लगी, “उम्म… क्या रसीली जीभ है भाभी…” वे भी कसकर जकड़ी रहीं।

फिर मैं गाल चूमता, ठोड़ी, कंधे, चूचियों पर पहुंचा, फिर चूसने लगा। भाभी ने मेरा लंड पकड़ा, सहलाने लगीं, फिर मेरा हाथ अपनी चूत पर ले गईं, “रगड़ो यहां लाला…” मैं चूचियां चूसते हुए चूत रगड़ने लगा, दाने पर ऊंगली फिराई। वे बोलीं, “ऊंगली अंदर डालो ना… हां, ऐसे…” मैंने ऊंगली घुसाई, चूत गीली, अंदर-बाहर करने लगा, वे सिसकारीं, “आह… ओह्ह… हां लाला… चोदो ऊंगली से… उईई…” चूत से पानी बहने लगा। फिर उन्होंने लंड पकड़ा, चूत के मुहाने पर रखा, “अब घुसाओ अपना लौड़ा मेरी बुर में, धीरे से, दर्द होगा…” मैंने धक्का मारा, सुपारा अंदर, फिर दूसरा धक्का, पूरा लंड चूत में समा गया। भाभी चिल्लाईं, “उईई… आह्ह… मां… बड़ा जालिम है तेरा लंड लाला… मार डाला…” कुछ देर चुप पड़े रहे, फिर वे बोलीं, “अब चोदो… हिलाओ कमर…” मैंने धीरे-धीरे शुरू किया, लेकिन अनाड़ी था, लंड बाहर निकल जाता। वे तड़पीं, “अनाड़ी का चोदना और चूत का सत्यानाश… ठीक से निशाना लगाओ लाला…” उन्होंने सिखाया, “लंड पकड़ो, मुंह पर रखो, धक्का मारो…” मैंने किया, अब सही से अंदर-बाहर होने लगा, रफ्तार बढ़ाई, वे नीचे से कमर उठातीं, “आह… हां… ऐसे चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… ओह्ह… स… स…” कमरे में फच-फच की आवाज गूंजने लगी। फिर वे ऊपर चढ़ीं, कमर हिलाकर चोदीं, चूचियां उछलतीं, मैं दबाता। आखिर दोनों झड़ गए, “आह… मैं गई रे लाला… ले मेरा रस…” मैं भी झड़ा, उनकी चूचियों पर लेट गया।

कुछ देर बाद फिर शुरू, उन्होंने लंड मुंह में लिया, चूसा, “गों… गों… क्या मजा है तेरे लंड का लाला…” मैंने चूत चाटी, जीभ अंदर-बाहर की, वे चिल्लाईं, “आह… चोदो जीभ से… उईई… मैं झड़ी…” फिर गांड मरवाने को कहा, वैसलीन लगाई, ऊंगली से छेद ढीला किया, मैंने लंड घुसाया, टाइट थी, वे चीखीं, “उईई… धीरे… फाड़ दी…” लेकिन मजा आया, चोदते रहे, “चोद मेरी गांड… हां… और जोर से…” पूरी रात मस्ती की, सुबह तक थककर सोए।

संबंधित पोस्ट

Hindi Sex Stories – LustMasti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!