डर्टी गर्ल सेक्स कहानी में मेरी बीवी की वासना और चुदाई की प्यासी नौकरानी की आपस में सेटिंग हो गयी, दोंनो ने एक दूसरी की चूत चाट कर जिस्म को मसल कर पानी निकाला.
दोस्तो, मैं मानस पाटिल एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी में आपको मजा देने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
मेड को बेटी बनाकर उससे सेक्स की तैयारी
में अब तक आपने पढ़ा था कि हमारी नौकरानी फ़रज़ाना अपने कमजोर पति के लंड से परेशान होकर मेरे लौड़े की फ़ोटो देख कर उससे चुदने के लिए मचल उठी थी और उसने मेरी बीवी सविता के सामने अपनी कामना जाहिर कर दी थी.
अब आगे डर्टी गर्ल सेक्स कहानी:
फ़रज़ाना को होश में लाती हुई सविता बोली- आए हए … मेरी बुलबुल इतना कहां खो गई? लगता है इतना बड़ा लौड़ा आज पहली बार देखा है तूने?
फ़रज़ाना ने हांफते हुए कहा- आह अम्मीज़ान सच में साहेब का इतना बड़ा है? आपकी कसम … आज पहली बार पता चला लुल्ली और लौड़े में क्या फर्क होता है!
सविता ने मज़े लेते हुए उसे डाँटा- बेशर्म लौंडिया … अपने पापा का लौड़ा देखने में शर्म नहीं आती? सच में बड़ी नालायक हो गई है तू चल अब जा, मेरे लिए वाइन ले आ!
फ़रज़ाना अपने कामुक होते मन को मारकर किचन की तरफ बढ़ी.
हमारी प्लानिंग के मुताबिक मैंने आज जानबूझ कर छोटा-सा बरमूडा पहना था, वह भी बिना कच्छे के.
मुझे किचन में देखकर वह चौंक गई.
मेरी नंगी चौड़ी छाती और गोरा बदन देख कर उसकी नज़र सीधे बरमूडा पर ठहर गई.
बातें सुनकर मेरा लौड़ा पहले से ही आधा खड़ा था.
फ़रज़ाना बरमूडे के ऊपर से इतना घूर रही थी जैसे आज चुदवाकर ही मानेगी.
सावी ने उसे छेड़ते हुए पूछा- क्या हुआ बेटी? कुछ चाहिए?
वह घबराती हुई हकलाई, ‘जी … जी … वह पापा …
मैंने फिर से उसकी इस हालत का मज़ा लिया- अरे? इतनी डरी-डरी क्यों लग रही है? कुछ चाहिए तो ले लो न!
उसने शर्माते हुए कहा- जी नहीं पापा … वह बस मेमसाब के लिए वाइन लेने आई थी!
मैंने जानबूझ कर द्विअर्थी बात मारी- ओह अच्छा तो फ्रिज से ले लो … या पूछो तुम्हारी अम्मी से, उन्हें स्पेशल वाली वाइन तो नहीं चाहिए?
मेरी बात का मतलब समझते ही वह लाल हो गई और बोली- वह तो आप खुद पूछ लो पापा, वैसे भी आपकी बीवी बड़ी बेशर्म है … पता नहीं दिन में भी स्पेशल वाली वाइन पी लेती हैं!
मैंने जोर से हंसते हुए कहा- हा हा हा अरे, तुम भी तो अपनी अम्मी जैसी हो … बस अभी थोड़ी कच्ची हो. कोई बात नहीं, हम हैं ना … हम पका देंगे इस मुर्गी को!
मेरे शब्दों से थोड़ी शर्माती हुई फ़रज़ाना बोली- हाय पापा, अभी भी कच्ची समझ रहे हो मुझे? किसी दिन पता चल जाएगा कि मुर्गी तो पूरी पकी हुई है!
हमारी बातें चल ही रही थीं कि तभी सविता ने उसे आवाज़ दे दी.
फ़रज़ाना ने फटाफट वाइन का गिलास भरा और सविता के पास चली गई.
धीरे-धीरे फ़रज़ाना का लगाव मेरी तरफ झुकने लगा.
बिलाल की नामर्दानी और मेरे लौड़े की तुलना में उसकी वासना अब पूरे उफान पर थी.
सविता और फ़रज़ाना के बीच की दूरी भी अब बिल्कुल खत्म हो चुकी थी.
उन दोनों में एक-दूसरे के नितंबों पर थप्पड़ लगाना, चूचियां मसल देना … ऐसी बातें तो आम हो गई थीं.
मैंने कई बार चुपके से किचन में झांककर देखा था कि सविता और फ़रज़ाना एक-दूसरे को चूमती हुई अपनी अपनी फुद्दियां भी मसलने लगतीं.
मालकिन-नौकरानी के रिश्ते से ज्यादा अब वह एक-दूसरे की सहेलियां बन चुकी थीं.
इसी बीच बिलाल को अचानक ज़मीन के सिलसिले में अपने गांव मुज़फ्फरनगर जाना पड़ा.
चूंकि बात सिर्फ दो-चार दिन की थी तो उसने अकेले ही जाने का फैसला किया.
बिलाल के गांव जाते ही सविता को अपनी कामना और वासना मिटाने का मौका मिल गया.
सविता ने फ़रज़ाना को अपने साथ सोने का सुझाव दिया.
हमारी योजना के मुताबिक मैंने पहले से ही कमरे में कुछ कैमरे छुपा दिए थे ताकि दोनों की चुदाई का आनन्द ले सकूँ.
खाना खत्म करके मैं अपने कमरे में आया और कैमरे के ज़रिए उनका खेल देखने को तैयार हो गया.
कमरे में आते ही वे दोनों एक-दूसरे पर ऐसे टूट पड़ीं, जैसे उनकी कई दिनों की प्रतीक्षा आज खत्म हो गई हो.
चंद पलों में दोनों मादरजात नंगी हो गईं. एक-दूसरे को बांहों में भरती हुई उनके होंठ आपस में टकराने लगे, चूचियां आपस में चिपक गईं.
सविता ने फ़रज़ाना की गर्दन चूमते हुए उसकी चूचियां चूसना शुरू कर दिया.
सविता अपने एक हाथ से फ़रज़ाना की चूत को सहलाने लगी.
उन दोनों की भड़की हुई वासना देख मेरे लौड़े में भी आग सी लग गई.
मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला, उस पर सांडे का तेल लगाया और मालिश करने लगा.
फ़रज़ाना की चूचियां मसल-मसलकर सविता ने उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से अपने मुँह से दबा कर चूसना शुरू कर दिया.
‘आआह्ह्ह्ह … अम्म्मीईई … उफ्फ्फ्फ्फ!’
कामुक आहें भरती हुई फ़रज़ाना बहकने लगी. उसकी चूत गीली होकर रस बहाने लगी.
उस रस को चाटने के मोह से मेरी पत्नी सविता ने अपना मुँह उसकी चूत में दबा दिया.
मैं देख रहा था कि कैसे फ़रज़ाना उस चुत चाटने की क्रिया से बेकाबू हो रही थी.
वह अपनी चूची के निप्पल को खींचती हुई एक हाथ से सविता का मुँह अपनी चूत में दबाकर सिसकारियां भर रही थी.
सविता जी भरकर फ़रज़ाना की चूत का रसपान करने के बाद बोली- ले बेटी तू भी चाट ले … अपनी अम्मीज़ान का भोसड़ा … देख ले तेरे पापा ने चोद-चोदकर कैसे फाड़ दिया!
सविता जानबूझ कर मेरी चुदाई की तारीफ करने लगी ताकि फ़रज़ाना खुद अपने मुँह से कबूल कर ले कि उसे भी मेरे लौड़े से चुदने की तड़प है.
फ़रज़ाना के मुँह पर अपने चूतड़ पटकते हुए उसने अपनी गांड में उसका पूरा चेहरा छिपा लिया और फिर से फ़रज़ाना की चूत चाटने लगी.
दोनों 69 की पोज़िशन में विपरीत दिशा में लेटकर अपनी-अपनी चूत एक-दूसरे के मुँह पर घिसने लगीं.
फ़रज़ाना का भरा-पूरा जवान बदन देखकर मुझसे रुका नहीं जा रहा था.
उसकी गुब्बारे जैसी उफान भरी चूचियां मेरी बीवी के शरीर पर दबकर लचक रही थीं.
नपुंसक बिलाल की वजह से उसकी चूत अब भी थोड़ी तंग ही दिख रही थी.
फ़रज़ाना की जीभ जैसे ही मेरी लुगाई के भोसड़े में घुसी, मेरी बीवी पागल हो गई और वह अपनी गांड उसके मुँह पर घिसती हुई चिल्लाने लगी- आआ आह्ह मेरी रंडी बेटीईई आह चूस ना अच्छे से … मादरचोदी आह … चूस साली अपनी अम्मी का छेदा आह कुतिया!
फ़रज़ाना ने भी अम्मी की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारते हुए जवाब दिया- हां साली बेगैरत रंडी अम्मी … देख ना … कैसे पापा ने तेरी चूत की मां चोद दी है साली छिनाल तू भी चूस ले … चूस अपनी बेटी की फुद्दी … आह्ह अम्मी … जीभ पूरा अन्दर घुसा कर चूस न!
दोनों ने अब जीभ के साथ-साथ तीन-तीन उंगलियां भी एक-दूसरे की चुत में ठूँस दीं.
चूत के ऊपर फूले दाने को काट-काटकर चूसती हुई, मां-बहन की गालियां देती हुई दोनों मां-बेटी वासना का खूब मजा ले रही थीं.
लंबे समय बाद मिल रहे शरीर-सुख से फ़रज़ाना ज्यादा देर टिक नहीं पाई और उंगलियों की चुदाई से ही उसका कामरस का फव्वारा छूट गया.
मेरी रंडी बीवी सविता ने चटखारे मार-मारकर फ़रज़ाना की चूत की सारी मलाई पी गई, यहां तक कि उसने अपनी उंगलियों पर लगी मलाई भी चाट ली.
फ़रज़ाना झड़ने से थोड़ी निढाल हो गई थी … पर सविता ने तुरंत अपनी गांड को जोर-जोर से उसके मुँह पर घिसना शुरू कर दिया था.
‘आआहह बेटी चाट ले … चाट अम्मी का भोसड़ा!’
यह कहते हुए उसने फ़रज़ाना की जीभ से अपनी चुत को साफ करवाना शुरू कर दिया.
अपनी अम्मीज़ान की चुत को जीभ से रगड़ती हुई फ़रज़ाना ने गांड का छेद भी चाटना शुरू कर दिया.
इस हमले से सविता भलभला कर मूतने लगी.
फ़रज़ाना का चेहरा और चूचियां भीग गए … आज उसने अपनी मुँह-बोली बेटी को भी मूत पिला दिया और अपनी वासना की आग बुझा ली.
सांसें काबू में करतीं दो नंगी औरतों के मदमस्त तन और उनकी वासना की उमंग देखकर मैंने भी अपने लौड़े की जोरदार मुठ मारते हुए गाढ़ा वीर्य त्याग दिया.
एक-दूसरे की बांहों में नंगी लेटीं, चूचियां मसलते हुए उनके होंठ फिर टकराने लगे.
चुतरस का स्वाद उनके मुँह में घुलने लगा.
जल्दी ही दोनों फिर से गर्मा गईं और मर्दों की तरह मां-बहन की गालियां देती हुई उन्होंने एक बार फिर से लेस्बियन सेक्स का भरपूर मजा लिया.
सविता की चूचियों में मुँह छिपाती हुई फ़रज़ाना बोली- शुक्रिया अम्मीज़ान … आज पहली बार किसी और के स्पर्श से झड़ी हूँ … वरना रोज़ खुद ही काम चलाना पड़ता था!
फ़रज़ाना का माथा चूमती हुई सविता बोली- इसमें शुक्रिया किस बात का बेटी? अभी तो शुरुआत है … आगे-आगे देखो, मैं तुझे बिल्कुल अपने जैसी चुदक्कड़ बना दूँगी!
सविता का प्यार देखकर फ़रज़ाना लजाती हुई बोली- अम्मी … बस एक और मेहरबानी कर दो इस अभागन पर … उसके बाद मुझे गुलाम बना लो या जान ले लो!’
सविता को अंदाज़ा हो चुका था, फिर भी दिखावे के लिए बोली- बोल बेटी … खुलकर बोल तेरे लिए तो मैं जन्नत ला दूँ!
फ़रज़ाना थोड़ी डरती और थरथराती हुई बोली- अम्मी … आपको तो पता ही है बिलाल के बारे में … और जब से मैंने साहेब जी का ‘वो’ देखा है, तब से तड़प रही हूँ … अगर आप कहें तो मैं साहेब जी से एक बार?
इतना कहते ही फ़रज़ाना ने आंखें बंद कर लीं.
सविता ने तुरंत भाँप लिया कि ये हवस से भरी लड़की किसी मर्द के साथ सहवास के लिए तड़प रही है.
फ़रज़ाना भले ही उसकी सगी बेटी नहीं थी, पर आखिर औरत ही औरत का दर्द समझ सकती है.
सविता तो मन ही मन खुश थी कि अब उसकी लेस्बियन भूख कभी भी फ़रज़ाना की चूत में मिटाई जा सकती थी.
फ़रज़ाना को देखकर वह शरारत भरे लहजे में बोली- ओह्ह्ह होओ ओओ तो अब तू अपने पापा से चुदवाना चाहती है? पर इसके बदले मुझे क्या मिलेगा … हूँ?
फ़रज़ाना व्याकुल होकर बोली- अब तो मैं आपकी गुलाम हूँ अम्मी, जैसे रखेगी वैसे रह लूँगी … बस एक बार मेरी प्यास बुझवा दो!
तब फ़रज़ाना को ज्यादा तड़पाए बिना सविता ने कहा- ठीक है … पर एक शर्त है कि मैं … ’
बात पूरी भी नहीं हुई थी कि डर्टी गर्ल फ़रज़ाना झट से चिल्लाई- आपकी सारी शर्तें मंजूर हैं अम्मी … उसके बाद चाहे मेरा गला काट देना … तो भी मैं उफ्फ तक न करूँगी. आपको ऊपर वाले का वास्ता!
फ़रज़ाना की बेबसी देखकर सविता हंस पड़ी- अरे छिनाल सुन तो ले पूरी बात … रंडी शर्त ये है कि मेरे सामने ही तुझे चुदवाना होगा … बोल मंजूर है?
‘हां’ कहती हुई फ़रज़ाना ने सविता को जोर से चूम लिया और बोली- शुक्रिया अम्मीज़ान, साहेब का मर्दाना लौड़ा तो मैं उस मादरचोद सूअर बिलाल के सामने भी लेकर चुत चुदवा लूँ!
फ़रज़ाना का जोश देखकर सविता चहकी- तो अभी बुला लूँ तेरे पापा को? देख ना … मादरचोद कुतिया … तेरी फुद्दी कैसे टपक रही है!
वासना की आग में जलती फ़रज़ाना बोली- अम्मी … अभी? पर साहेब मान तो जाएंगे ना?
बिना जवाब दिए सविता बिस्तर से उठी और नंगी ही मेरे कमरे की तरफ चल पड़ी.
मैं समझ गया कि अब मेरा नंबर आ गया है.
सविता को पता था कि मैं उनकी सारी चुदाई देख रहा हूँ.
कमरे में आते ही उसने मेरा कड़क लंड देखा और घुटनों पर बैठकर लौड़े को मुँह में ठूँस लिया.
दोनों की कामक्रीड़ा देख मेरा वीर्य कबसे उबल रहा था.
सविता के चूसते ही कुछ पल में गाढ़ा माल उसके मुँह में टपकने लगा.
बाजारू रंडी की तरह मेरा वीर्य निगलती हुई वह बोली- कैसा लगा शो? चलो … अब फँस गई मुर्गी … कर दो हलाल!
सविता को गोद में उठाकर मैं उसके वीर्य से सने होंठ चूसते हुए खड़ा हो गया.
जैसे ही हम कमरे में घुसे, फ़रज़ाना आंखें बंद करके लेटी थी.
शायद मेरे साथ चुदाई की कल्पना में अपनी चूत रगड़ रही थी.
उसका ध्यान तोड़ने को मैंने सविता की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा.
आवाज़ सुनकर फ़रज़ाना घबरा गई और नंगा बदन ढकने लगी.
सविता हंसकर बोली- अब क्या हुआ रंडी? देख … तेरे पापा आ गए, अब डर कैसा?
चादर खींचकर उसने फ़रज़ाना को मेरे सामने पूरी नंगी कर दिया.
मुझे इशारा करके सविता ने उसे भी खड़ी करवा दिया.
फ़रज़ाना की नंगी जवानी देख मेरे लौड़े ने फिर से ठुमका लगाया.
गर्दन झुकाए खड़ी फ़रज़ाना कामदेवी-सी मदमस्त और मादक लग रही थी.
मैं तो बस उसे निहारता रह गया.
सविता मुझे धक्का मारती हुई बोली- अब क्या ऐसे ही घूरते रहोगे? मसल दो साली को!
फ़रज़ाना चोर नज़रों से मेरा आधा खड़ा लंड देख रही थी.
मैंने पहल की, उसका हाथ पकड़ा और सीधे अपने लौड़े पर रख कर दबा दिया.
गदराई मांसल गांड अपनी मुट्ठी में मसलते हुए मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया और अपने होंठ उसके होंठों पर चिपका दिए.
फ़रज़ाना तो बस मेरी पहल की प्रतीक्षा कर रही थी.
मेरे चुंबन का जवाब वह उतनी ही मादकता से देने लगी.
उसकी उत्तेजना देख मैं मचल उठा- वाह बेटी, बड़ी गर्म चीज़ है तू छिनाल साली … देख सावी, तेरी रंडी बेटी कैसे पापा का लौड़ा लेने को तरस रही है!
सविता मेरे पास आकर हंसती हुई बोली- पसंद तो आ गई ना मेरी बेटी? है न बिल्कुल मेरे जैसी चुदक्कड़?
फ़रज़ाना तो मुझ पर पूरी तरह फिदा हो चुकी थी.
मेरा सीना चूमते-चूमते आखिरकार उसने लौड़ा हाथों में ले ही लिया.
दोस्तो, जवान फ़रज़ाना मेरे लंड से किस तरह से चुदी, इसकी पूरी दास्तान आपको डर्टी गर्ल सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ने को मिलेगा.
आप मुझे अपने कमेंट्स जरूर भेजें.
replyman12@gmail.com
डर्टी गर्ल सेक्स कहानी का अगला भाग: