बूढ़े अंकल ने चाटी मेरी रसीली चूत – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Old neighbor sex story – Buddhe uncle dirty talk sex story – Lonely wife affair sex story: मेरा नाम मुस्कान है, उम्र अब 30 साल की हो चुकी है, लेकिन ये कहानी चार साल पहले की है जब मैं 26 की थी। फिगर मेरा 34-29-30 का है, लंबी हूं और गोरी चिट्टी रंगत वाली, देखने में काफी आकर्षक लगती हूं। मेरे पति दूसरे शहर में जॉब करते हैं, मैं यहां एक छोटे से किराए के फ्लैट में अकेली रहती हूं। सास-ससुर अलग शहर में रहते हैं, मैं हफ्ते में एक बार उनसे मिलने जाती हूं। मैं अपने पति से पूरी तरह वफादार हूं, कभी किसी और मर्द की तरफ आंख नहीं उठाई, कोई अफेयर नहीं चलाया। लेकिन जिंदगी में कभी-कभी ऐसी मजबूरियां आ जाती हैं जो सबकुछ बदल देती हैं।

ये बात मई 2022 की है, पिछले महीने की घटना। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हूं, रोज ड्यूटी जाती हूं। उस शुक्रवार को मैं शाम को थकी हुई घर लौटी, पूरा हफ्ता काम में निकल गया था। घर पहुंचते ही सोचा पहले कपड़े धो लूं, क्योंकि वॉशिंग मशीन में सारे हफ्ते के गंदे कपड़े जमा हो गए थे। मैंने जल्दी से ड्रेस चेंज की, एक टाइट वाली सफेद टी-शर्ट पहनी और नीचे छोटी सी ब्लू शॉर्ट्स, ब्रा लगाना भूल गई क्योंकि घर में अकेली थी और बाहर जाने का प्लान नहीं था। टी-शर्ट इतनी फिटिंग वाली थी कि मेरे निप्पल बाहर से साफ उभरे हुए नजर आ रहे थे, पतली फैब्रिक की वजह से। मैंने आईने में खुद को देखा, बाल खुले हुए, चेहरा थकान से चमक रहा था, लेकिन फिगर देखकर खुद पर ही थोड़ा गर्व हुआ, मन में एक हल्की सी उत्तेजना सी महसूस हुई, लेकिन मैंने इग्नोर कर दिया।

बालकनी में जाकर कपड़े धोने लगी, मशीन चला दी और इधर-उधर टांगने लगी। मैं दूसरे फ्लोर पर रहती हूं, नीचे ग्राउंड फ्लोर पर अंकल-आंटी रहते हैं, अंकल की उम्र करीब 65 साल होगी, रिटायर्ड हैं, आंटी बीमार रहती हैं। तभी नीचे से अंकल की आवाज आई, “बेटी मुस्कान, जरा जल्दी नीचे आओ, इमरजेंसी है!” उनकी आवाज में घबराहट थी, मैंने सोचा कुछ सीरियस होगा। मशीन बंद की और दौड़कर सीढ़ियां उतरने लगी। दौड़ते हुए मेरे स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे, टी-शर्ट टाइट होने से सब कुछ हिल रहा था। नीचे पहुंची तो अंकल सीढ़ियों के पास खड़े थे, उनकी आंखें मेरे उछलते स्तनों पर टिकी हुई थीं, वो ऐसे घूर रहे थे जैसे कभी औरत देखी ही न हो। मैंने पूछा, “क्या हुआ अंकल जी? सब ठीक है?” उन्होंने थोड़ा हकलाते हुए कहा, “हां बेटी, तेरी आंटी की तबीयत अचानक खराब हो गई है, बीपी हाई हो गया लगता है, जरा चेक कर ले।” मैं नर्सिंग का कोर्स कर चुकी हूं, तो मैंने उनका बीपी चेक किया, दवा दी, आंटी को आराम करने को कहा। इस दौरान मैं झुककर काम कर रही थी, और मुझे महसूस हो रहा था कि अंकल की नजर मेरी गांड पर अटकी हुई है, शॉर्ट्स छोटी थी तो थोड़ी सी गांड की दरार भी दिख रही होगी। मैंने सोचा बूढ़ा है, क्या करेगा, लेकिन अंदर से थोड़ा मजा भी आ रहा था, क्योंकि लंबे समय से पति से दूर थी, बॉडी की डिमांड तो होती ही है। मैंने जानबूझकर थोड़ा मटककर चली, गांड हिलाकर, अंकल सीढ़ियों से मुझे देखते रहे, उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी।

फिर मैं ऊपर आई, कपड़े धोए, किचन में जाकर खाना बनाया। शाम को थोड़ी देर के लिए बाजार गई, कुछ सामान लेने, पड़ोस की आंटी से मिली, थोड़ी गपशप की। घर लौटी तो देखा मेरा फ्लैट का दरवाजा बंद है, मैंने चाबी निकाली लेकिन अंदर से लॉक लगा हुआ लग रहा था, नहीं, मैंने खुद लॉक किया था। बेल बजाई, काफी देर बाद अंकल आए, दरवाजा खोला। उनकी सांसें तेज चल रही थीं, चेहरा पसीने से भीगा हुआ, आंखें डरी हुई सी। मैंने पूछा, “अंकल जी, आप यहां? और इतनी हांफ क्यों रहे हो?” उन्होंने घबराकर कहा, “नहीं बेटी, बस आंटी को दवा देने आया था, ऊपर से आवाज सुनाई दी तो चेक करने आ गया।” लेकिन मुझे शक हुआ, क्योंकि वो ऐसे लग रहे थे जैसे कुछ छुपा रहे हों। मैंने पूछा, “आंटी अब कैसी हैं?” “ठीक हैं, सो रही हैं,” कहकर वो नीचे चले गए। मैं अंदर आई, सामान किचन में रखा, बाथरूम गई तो देखा मेरी एक पैंटी फर्श पर गिरी पड़ी है, जो मैंने सुबह टांगी थी। मैंने सोचा शायद हवा से गिरी होगी, लेकिन वो थोड़ी गीली सी लग रही थी, मैंने इग्नोर कर दिया।

रात के 10 बज चुके थे, मैंने खाना खाया, दरवाजा लॉक किया, टीवी ऑन करके सोफे पर लेट गई। थकान से नींद आने लगी, लेकिन अचानक कुछ आवाज सुनाई दी, जैसे कोई दबे पांव चल रहा हो। दिल तेज धड़कने लगा, इतनी रात को कौन? मैंने हिम्मत करके उठी, दबे पांव दरवाजे तक गई, हल्का सा खोला। बाहर अंधेरा था, लेकिन बाथरूम की लाइट जल रही थी, दरवाजा थोड़ा खुला। मैंने झांककर देखा तो पैरों तले जमीन खिसक गई। अंकल मेरी पैंटी को नाक से लगाकर गहरी सांस ले रहे थे, सूंघ रहे थे जैसे कोई नशा कर रहे हों, और मेरी ब्रा पर अपना ढीला सा लंड रगड़ रहे थे, हल्के-हल्के हिलाते हुए। उनका लंड पुराना लग रहा था, चमड़ी ढीली, लेकिन वो ऐसे कर रहे थे जैसे कोई जवान लड़का। अचानक उनका वीर्य निकला, सारा ब्रा और पैंटी पर फैल गया। मैं स्तब्ध थी, लेकिन आवाज नहीं की। फिर उन्होंने दोनों को पानी से धोया, साफ किया, टांगा और चुपके से नीचे चले गए। मैं कमरे में आई, दिल तेज धड़क रहा था। सोचने लगी, बूढ़ा आदमी इतना गिरा हुआ? लेकिन उसकी नजर तो दिन में ही समझ आ गई थी, जब मेरे स्तनों को घूर रहा था। रातभर नींद नहीं आई, बार-बार वो सीन याद आता रहा, अंदर से एक अजीब सी उत्तेजना भी हो रही थी, क्योंकि सेक्स किए हुए साल भर हो गया था।

अगला दिन शनिवार था, मैं ड्यूटी पर गई, लेकिन दिमाग में वही घूमता रहा। शाम को घर आई, फोन किया तो पता चला सास-ससुर ननद के यहां गए हैं, अगले दिन रविवार को मेरा बर्थडे था। मैं नीचे आंटी के पास गई, उनका बीपी चेक किया, बातें की। आंटी बोलीं, “बेटी, आज यहीं रुक जा, अंकल कहीं बाहर गए हैं, रात को अकेली मत रह।” मैं मान गई, क्योंकि अकेले मन नहीं लग रहा था। दोनों का खाना बनाया, आंटी को दवा दी, वो अपने रूम में सो गईं। मैंने छोटी सी पिंक नाइटी पहनी, जो घुटनों तक आती थी, नीचे ब्रा-पैंटी, लेकिन नाइटी पतली थी, सब कुछ हल्का सा ट्रांसपेरेंट। मैं बाहर सोफे पर लेट गई, टीवी देखते-देखते आंख लग गई। आधी रात में लगा कोई मेरी जांघों को सहला रहा है, धीरे-धीरे हाथ ऊपर की तरफ जा रहा था, पैंटी के ऊपर से चूत को छू रहा था। गर्म सांसें मेरी कमर पर लग रही थीं। मैंने आंखें खोलीं तो अंकल मेरे ऊपर झुके हुए थे, आंखों में वासना भरी हुई, मुस्कुरा रहे थे। मैं चौंक गई, लेकिन गुस्से की बजाय मैंने शरारत की, उनका सिर पकड़ा और अपनी पैंटी पर दबा दिया। वो घबरा गए, उठने लगे, बोले, “सॉरी बेटी, गलती हो गई।” मैंने धीरे से कहा, “चुप रहो अंकल जी, ऊपर चलो मेरे फ्लैट में, नहीं तो आंटी को आवाज देकर सब बता दूंगी।” वो डर गए, चुपचाप मेरे साथ ऊपर आ गए।

मैंने दरवाजा लॉक किया, लाइट ऑन की, और पूछा, “अंकल जी, ये सब कब से चल रहा है? कल रात मैंने सब देख लिया था।” उन्होंने सर झुकाकर कहा, “बेटी, काफी दिनों से, तू इतनी सुंदर है, मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। आंटी बीमार रहती है, सालों से कुछ नहीं हुआ।” मैं भी अकेली थी, पति दूर, बॉडी की आग जल रही थी। सोचा, इस बूढ़े से ही काम चला लूंगी, कम से कम मजा तो आएगा। मैंने अपनी नाइटी ऊपर से उतार दी, अब सिर्फ लाल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। मेरे स्तन ब्रा से बाहर आने को बेताब, गांड गोल-मटोल। अंकल की आंखें फटी रह गईं, बोले, “वाह बेटी, क्या माल है तू, इतनी हॉट बॉडी, मेरी तो किस्मत खुल गई।” मैंने कहा, “अंकल जी, सिर्फ ऊपर से खेलना, अंदर मत डालना, ताकि मुझे भी मजा आए, और डरो मत, आंटी सुबह 10 बजे से पहले नहीं उठतीं।” उन्होंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे, शर्ट, पैंट, सब फेंक दिया। फिर अंडरवियर उतारा, उनका लंड 5 इंच का, ढीला लटक रहा था, चमड़ी ढीली, टट्टे नीचे तक लटके हुए, बालों से भरे। मैंने पकड़ा, बिल्कुल ठंडा था। बोली, “अंकल जी, इतनी सेक्सी लड़की नंगी खड़ी है, और आपका लंड अभी तक सो रहा है? शर्म नहीं आती?” उन्होंने हंसकर कहा, “बेटी, उम्र हो गई है, लेकिन तू हिला दे, देख कितना खड़ा हो जाएगा।”

मैंने उनका लंड हाथ में लिया, धीरे-धीरे हिलाने लगी, ऊपर-नीचे, टट्टों को सहलाया। वो मेरी ब्रा के ऊपर से स्तन दबाने लगे, जोर से मसलने लगे, बोले, “आह, कितने टाइट हैं तेरे मम्मे, ब्रा खोल दे बेटी, चूस लूं।” मैंने मना किया, “नहीं अंकल जी, अभी नहीं, पहले मुझे गर्म करो।” उन्होंने एक हाथ मेरी पैंटी पर रखा, चूत को ऊपर से सहलाने लगे, उंगली से क्लिट को रगड़ने लगे। मैं गर्म होने लगी, पैंटी गीली हो गई, मुंह से निकला, “आह्ह.. अंकल जी.. कितना अच्छा लग रहा है.. जोर से करो.. हां ऐसे..” उनका लंड अब सख्त होने लगा, 7 इंच का हो गया, लेकिन मोटाई कम थी। मैंने जोर से हिलाया, बोली, “वाह अंकल जी, अब तो लौड़ा खड़ा हो गया, लेकिन इतना पतला क्यों? मेरी चूत को भर पाएगा?” वो बोले, “बेटी, ट्राई करके देख, मजा आएगा।”

मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया, पैंटी साइड की, उनकी चूत पर लंड रगड़ने लगी, ऊपर-नीचे। मजा आने लगा, “ओह्ह.. अंकल जी.. आह्ह.. कितना गर्म है आपका लौड़ा.. रगड़ो मेरी बुर पर.. हां..” वो आंखें बंद करके享受 कर रहे थे। फिर मैं नीचे झुकी, उनका लंड मुंह में लिया, चूसने लगी, जीभ से टिप को चाटा, “ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों..” आवाजें निकल रही थीं। वो बोले, “आह बेटी, क्या चूस रही है, जैसे रंडी हो, जोर से चूस मेरे लौड़े को।” हम 69 पोजीशन में आ गए, वो मेरी चूत चाटने लगे, जीभ अंदर डालकर, “आह्ह.. इह्ह.. ओह्ह.. अंकल जी.. चाटो मेरी बुर.. जीभ से चोदो.. ऊंह्ह.. हां ऐसे.. आऊ.. ऊउइ..” मैं चिल्ला रही थी। उन्होंने कहा, “तेरी चूत कितनी रसीली है बेटी, नमकीन स्वाद, चाटता रहूं पूरी रात।”

फिर मैंने कंडोम लगाया उनके लंड पर, उन पर बैठ गई, धीरे से अंदर लिया। पहले लगा जैसे पेंसिल डाली हो, लेकिन पूरा अंदर गया। मैं ऊपर-नीचे होने लगी, “आह्ह.. ओह्ह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. अंकल जी.. चोदो मुझे.. आपका लौड़ा मेरी चूत में.. आअह्ह्ह्ह..” वो नीचे से जटके मार रहे थे, बोले, “हां बेटी, कूद मेरे लौड़े पर, तेरी टाइट बुर क्या मजा दे रही है।” फिर डॉगी स्टाइल में आए, उन्होंने मेरी गांड पर लंड रखा, धीरे से अंदर किया। मैं चीखी, “आह्ह.. दर्द हो रहा है अंकल जी.. लेकिन अच्छा लग रहा.. जोर से चोदो.. मेरी गांड मारो..” वो पीछे से धक्के लगाने लगे, “तेरी गांड कितनी मस्त है बेटी, गोल-गोल, चोदता रहूं।” 15 मिनट बाद वो झड़ गए, लेकिन मैं अधूरी थी। मैंने कोशिश की उनका लंड फिर खड़ा करने की, चूसा, हिलाया, लेकिन नहीं हुआ। मैं किचन गई, गाजर लाई, चूत में डाली, हिलाने लगी, “आह्ह.. ओह्ह.. गाजर से चुद रही हूं.. बूढ़ा कुछ नहीं कर पाया..” रातभर गाजर से तीन बार पानी निकाला, अंकल सो गए, लेकिन वो रात यादगार थी।

संबंधित पोस्ट

Hindi Sex Stories – LustMasti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!