College chudai story, Ritika rani ki pelai, Classroom blackmail sex, Desi dirty talk, Bench par choda: मैं दीपक, गोंडा का रहने वाला हूँ। पिछले साल ही मैंने कॉलेज में बीए में एडमिशन लिया था, और अब क्लासेस भी रेगुलर चलने लगी थीं। हमारी क्लास में कुल २५ लड़कियां थीं, लेकिन ज्यादातर वैसी जो नजर में आती ही नहीं, कुछ काली-कलूटी, कुछ ऐसी जिनमें कोई खास बात नहीं थी। दस लड़कियां तो पहले से शादीशुदा थीं, और वो अपने पतियों से चुद चुकी थीं, साफ पता चलता था उनके हाव-भाव से।
कुछ लड़कियां ऐसी थीं जो लड़कों से बिल्कुल बात नहीं करतीं, शायद डरती थीं कि कहीं कोई उन्हें पटाकर चोद न दे। लेकिन कुल मिलाकर तीन लड़कियां ऐसी थीं जो लड़कों से खूब मीठी-मीठी बातें करतीं, हंसती-खेलतीं, और लगता था कि वो चुदवाने के मूड में ही रहती हैं। इन सबमें सबसे मस्त माल थी रितिका रानी।
रितिका ५ फुट ४ इंच की थी, गोरी-चिट्टी, भरा हुआ जिस्म, बड़े-बड़े मम्मे जो सलवार सूट में से भी उभरकर दिखते थे, पतली कमर और गोल-गोल गांड। उसके होंठ इतने रसीले थे कि देखते ही मन करता था उसके मुंह में लंड ठूंसकर चुसवाऊं, गले तक डालकर, और फिर उसकी चूत को चोद-चोदकर फाड़ दूं। क्लास में जब वो आती तो सब लड़के उसे घूरते रहते, मेरा लंड तो बस उसे देखते ही खड़ा हो जाता था।
धीरे-धीरे मैं रोज़ क्लास में उसे देखकर घर जाकर मुठ मारने लगा। कभी उसके मम्मों की कल्पना करता, कभी उसके होंठों की, कभी सोचता कि काश वो मेरे नीचे लेटी हो और मैं उसे पेल रहा हूं। लेकिन रितिका थोड़ी शर्मीली लगती थी, लड़कों से बात तो करती लेकिन ज्यादा आगे नहीं बढ़ती। क्लास के लड़के जैसे मैं, निर्मल, सतीश, श्रवण सब उसके पीछे पड़े थे, लेकिन कोई पटाने में कामयाब नहीं हो पा रहा था।
एक दिन दोपहर के करीब २ बजे थे। क्लास का टाइम था लेकिन मेरा मन आज कुछ उदास था, शायद कल रात ज्यादा मुठ मारी थी या क्या पता। मैं आर्ट्स साइड की बिल्डिंग में अकेला टहल रहा था, क्लास जाने का बिल्कुल जी नहीं कर रहा था। चार कमरे पार करके मैं एक बालकनी पर पहुंचा, जहां से कॉलेज का ग्राउंड दिखता था। मैंने जेब से सिगरेट निकाली, लाइटर जलाया और एक गहरा कश खींचा। धुआं मुंह से निकालते हुए मैं बाहर की हवा महसूस कर रहा था।
तभी अचानक मेरे कानों में कुछ अजीब आवाजें पड़ीं। पास के एक कमरे से, जो मेरे कमरे से चार कमरे छोड़कर था, तेज-तेज आवाजें आ रही थीं। “ओह्ह्ह… माँ… अह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ… चूसो ना… और चूसो… मेरी चूत को अच्छे से पियो… अह्ह्ह्ह… उईईई…” ऐसी गर्म-गर्म सिसकारियां।
मेरा दिमाग एकदम हिल गया। सिगरेट का एक और लंबा कश लेकर मैंने धुआं बाहर फेंका और चुपके से उस कमरे की तरफ बढ़ा। दरवाजा थोड़ा-सा खुला हुआ था, मैंने हल्के से झांका तो अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें फटी रह गईं। लेकिन मैंने कोई आवाज नहीं की, चुपचाप अंदर घुसा और एक बेंच के पीछे छिप गया।
कमरे में लंबी-लंबी बेंचें थीं, और बीच में दो लोग पूरी तरह से डूबे हुए थे गर्मागर्म चुदाई में। मैंने ठीक से देखा तो मेरी गांड फट गई। मेरा जिगरी दोस्त निशांत, जो मेरे साथ रोज़ क्लास में बैठता था, वो क्लास की सबसे मस्त माल रितिका रानी को घपाघप चोद रहा था।
“बहनचोद… इसने तो रितिका को पटा लिया और चोद ही लिया!” मैंने मन ही मन कहा। देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया, पैंट में तंबू बन गया। मैंने सिगरेट पैर तले कुचलकर बुझा दी और चुपके से फर्श पर बैठ गया, बेंच की आड़ में छिपकर सब देखने लगा।
निशांत ने रितिका को पटा लिया था, और आज उसकी चूत की सील तोड़ रहा था। नहीं, सील तो नहीं, क्योंकि वो पहले से चुद चुकी लगती थी, लेकिन क्लास में सब उसे कुंवारी समझते थे। रितिका के कपड़े बेंच के किनारे पर रखे थे – सलवार, सूट, दुपट्टा, ब्रा और पैंटी सब। वो पूरी तरह नंगी थी, गोरा चिकना बदन, बड़े-बड़े मम्मे लटक रहे थे, गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैं उसके पूरे जिस्म के दर्शन कर रहा था, और मन कर रहा था कि अभी कूद पड़ूं।
मैंने फौरन अपना स्मार्टफोन निकाला और चुपके से वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। सोचा, इससे बाद में निशांत को ब्लैकमेल करके मैं भी रितिका की चूत का मजा लूंगा। दोनों खामोश थे, लेकिन रितिका की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।
निशांत रितिका पर पूरी तरह लेटा हुआ था, उसके गुलाबी रसीले होंठों को मस्ती से चूस रहा था। रितिका भी उसके होंठों को चूस रही थी, दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। रितिका कराह रही थी, “आह्ह… निशांत… राजा… चूसो ना… और जोर से… अह्ह्ह…” निशांत उसके होंठ छोड़कर नीचे आया और उसके मम्मों पर मुंह लगा दिया।
“उफ्फ्फ… मादरचोद… कितने बड़े दूध हैं तेरे… ३६ साइज के… मैं तो रोज़ इन्हें देखकर मुठ मारता था… आज पीऊंगा जी भरकर,” निशांत बोला, और एक मम्मा मुंह में भर लिया। रितिका की आंखें बंद हो गईं, वो सिसकारी, “आह्ह… हाँ… पी लो… मेरे राजा… चूसो इन्हें… अह्ह्ह… ऊईई…”
निशांत एक-एक करके दोनों मम्मों को चूसता रहा, निप्पल्स को दांतों से हल्के से काटता, चाटता। रितिका का बदन थरथरा रहा था, वो निशांत के बालों में उंगलियां फेर रही थी। करीब बीस मिनट तक वो उसके मम्मे पीता रहा, फिर नीचे सरका। उसने रितिका का पेट चाटा, नाभि में जीभ डाली, चूसा। रितिका तड़प उठी, “ओह्ह… निशांत… नीचे… मेरी चूत… चाटो ना… प्लीज… अह्ह्ह…”
निशांत हंसा, “साली… इतनी गर्म हो गई है… तेरी चूत तो पहले से गीली है… देख कितना रस टपक रहा है।” वो अपना ७ इंच का मोटा लंड हाथ में लेकर रितिका की चूत पर ऊपर-नीचे घिसने लगा। रितिका की चूत गुलाबी, चिकनी, हल्के बालों वाली थी, और रस से चमक रही थी।
रितिका तड़प रही थी, “आह्ह… राजा… डाल ना… मत तड़पाओ… चोदो मुझे… अपनी रितिका को चोद दो… अह्ह्ह… ऊउइ… ऊईई…” निशांत मस्ती में था, वो जानबूझकर सिर्फ घिस रहा था, अंदर नहीं डाल रहा। रितिका की आंखों में कामुकता साफ दिख रही थी, वो प्यासी की तरह तड़प रही थी।
फिर निशांत नीचे झुका और रितिका की चूत पर मुंह लगा दिया। जीभ से चाटने लगा, क्लिट को चूसा। रितिका चीखी, “आआआह्ह्ह… हाँ… चाटो… मेरी चूत चाटो… ओह्ह… माँ… कितना मजा आ रहा है… और चाटो… ग्ग्ग्ग… गी… गी…” निशांत की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, वो रितिका का रस पी रहा था।
कुछ देर बाद निशांत उठा, अपना लंड रितिका की चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा। सट्ट…! पूरा लंड अंदर चला गया। रितिका की आंखें फैल गईं, “आआआह्ह्ह… निशांत… मेरे जान… कितना मोटा है तेरा… फाड़ दिया… चोदो मुझे… जोर से… अह्ह्ह…”
निशांत धीरे-धीरे कमर हिलाने लगा, फिर स्पीड बढ़ाई। चत-चत… पट-पट… की आवाजें गूंजने लगीं। रितिका के मम्मे उछल रहे थे, वो निशांत की कमर पकड़कर खुद भी नीचे से धक्के दे रही थी। “हाँ… चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… साले… रोज़ घूरता था… आज ले ले मजा… आह्ह… ऊँ… ऊँ… सी… सी…”
निशांत बोला, “साली… कितनी टाइट है तेरी चूत… रोज़ क्लास में तेरे मम्मे देखकर लंड खड़ा होता था… आज चोद रहा हूं… ले ले मेरा लंड… पूरा अंदर…” वो गहरे-गहरे धक्के मार रहा था। दोनों पसीने से तर हो गए थे, कमरे में सिर्फ उनकी सांसें और चुदाई की आवाजें।
मैं बेंच के पीछे छिपा सब देख रहा था, मेरा लंड फटने को था। मैंने चुपके से पैंट खोली, अंडरवियर में हाथ डाला और जोर-जोर से मुठ मारने लगा। “उफ्फ… कितनी मस्त चुदाई है… रितिका साली चुद रही है…” मैं मन में सोच रहा था।
निशांत ने रितिका को होठ चूसते हुए चोदा, फिर उसका मुंह अपने मुंह में दबा लिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे चुदाई के नशे में डूबे थे। चुदाई क्लाइमेक्स पर पहुंच गई, निशांत हूँ… हूँ… करके हुमक-हुमक कर पेल रहा था। आखिरकार उसने अपना माल रितिका की चूत में छोड़ दिया। रितिका भी झड़ गई, “आआआह्ह्ह… हाँ… भर दे… मेरी चूत में… ओह्ह…”
दोनों आधे घंटे तक नंगे लिपटे रहे, एक-दूसरे को चूमते, सहलाते। फिर कपड़े पहनने लगे। मैंने ताली बजानी शुरू की। दोनों चौंक गए। “दीपक… तू?” निशांत बोला।
“हाँ बेटा… सब देख लिया… वीडियो भी बना लिया। अब रितिका की चूत दिला, वरना पूरे कॉलेज में फैला दूंगा,” मैंने हंसकर कहा।
निशांत गुस्से में था लेकिन मान गया। रितिका शर्मा रही थी, लेकिन मैंने उसे बेंच पर लिटाया। पहले उसके होंठ चूसे, मम्मे पीए, चूत चाटी। फिर अपना लंड उसकी चूत में डाला, “ले साली… अब मेरी बारी… चोदूंगा तेरी चूत… आह्ह…” रितिका कराही, “आह्ह… दीपक… मत करो… लेकिन… ओह्ह… चोदो ना… जोर से…”
मैंने उसे आधे घंटे चोदा, फिर गांड में डाला। “उफ्फ… कितनी टाइट गांड है… ले मेरा लंड…” रितिका चीखी, “आआआह्ह्ह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… पेलो…” आखिरकार झड़ गया। वीडियो डिलीट किया, लेकिन मजा यादगार था।
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