दादा जी का आशीर्वाद – Antarvasna Sex Stories – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Dada ji sex story – Dada Poti Sex story – Grandfather granddaughter hindi sex story: मैं नंदिनी हूँ, घर की लाड़ली, वो लड़की जिसे सब प्यार से बुलाते हैं लेकिन अंदर से एक आग सुलग रही है जो किसी को पता नहीं, और ये कहानी उस आग की है जो मेरे दादा जी ने जलाई, उस दिन से सब कुछ बदल गया जब मैंने उनकी नजरों का राज पकड़ा, वो नजरें जो मेरे शरीर पर रेंगती थीं जैसे कोई पुराना भूत जाग गया हो।

हम सब हॉल में बैठे थे, परिवार की वो आम शाम, टीवी पर पुरानी फिल्म की धुंधली रोशनी कमरे में फैली हुई, हवा में घर की वो मिट्टी और मसालों की महक घुली थी, मैंने लाल साड़ी पहनी थी, वो जो मेरी कमर को कसकर लपेटती थी और मेरे बूब्स को ऊपर उठाकर सेक्सी बना देती थी, दादा जी मेरे बगल में सोफे पर थे, उनकी सफेद कुर्ता-पायजामा वाली बॉडी अभी भी मजबूत लग रही थी, उम्र की झुर्रियाँ उनके चेहरे पर लेकिन आँखों में वो चमक जो मुझे डराती भी थी और खींचती भी, मैंने महसूस किया कि वो चुपके-चुपके मेरी साड़ी के ऊपर से मेरे बूब्स को घूर रहे थे, उनकी नजरें बार-बार वहाँ रुकतीं, जैसे भूखा आदमी रोटी को देख रहा हो, हर बार जब मैं हिलती तो उनका सिर थोड़ा सा मुड़ता, लेकिन चेहरा न्यूट्रल रखते, मैंने जानबूझकर अपनी साड़ी ठीक की ताकि पल्लू थोड़ा सरक जाए, और उनकी पुतलियाँ फैल गईं।

पहले तो मुझे अजीब लगा, एक ठंडी सिहरन दौड़ी पीठ पर, दादा जी, मेरे अपने दादा जी जो मुझे गोद में खिलाते थे, लेकिन साथ ही वो उत्तेजना, जैसे कोई गर्म लावा नीचे बह रहा हो, मेरी छाती तेज धड़क रही थी, साँसें उखड़ी हुईं, और नीचे पैंटी में वो गीलापन, चिपचिपा रस जो मेरी जाँघों के बीच फैल रहा था, मैंने पैर क्रॉस किए लेकिन वो सेंसेशन और तेज हो गया, जैसे मेरी चूत खुद कह रही हो कि ये गलत नहीं बल्कि जरूरी है, मैं समझ नहीं पा रही थी, अच्छा लग रहा था वो नजरों का स्पर्श, लेकिन मन में अपराध बोध की लहरें भी उठ रही थीं, क्या मैं पागल हो गई हूँ।

शाम को रूम में जाकर आईने के सामने खड़ी हुई, साड़ी अभी भी पहने, मैंने खुद को देखा, मेरे बूब्स बड़े, गोल, निप्पल्स सख्त होकर साड़ी से उभरे हुए, मैंने हाथ रखा और दबाया, आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. एक छोटी सी कराह निकली, क्या दादा जी इन्हें छूना चाहते हैं, चूसना चाहते हैं, वो विचार ने मुझे और गीला कर दिया, रस अब पैंटी से बाहर टपक रहा था, मैं बिस्तर पर लेटी, साड़ी ऊपर सरकाई, पैंटी साइड की, उंगली डाली चूत में, गर्म, गीली, चिपचिपी, आह इह्ह ओह्ह.. दादा जी की नजरें याद आईं, कल्पना की कि वो मुझे घूरते हुए छू रहे हैं, दो उंगलियाँ घुसेड़ीं, अंदर-बाहर, तेज, मेरे निप्पल्स को दूसरे हाथ से मसला, दबाया, क्लाइमैक्स के करीब पहुँची तो रुक गई, फिर शुरू, वो टेंशन बिल्ड-अप मुझे पागल कर रहा था, आखिर झड़ी, रस फैला बिस्तर पर, लेकिन संतुष्टि नहीं, बस दादा जी की चाहत और बढ़ गई, रात भर नींद नहीं आई, बचपन की यादें घूमती रहीं—दादा जी की गोद, कहानियाँ, लेकिन अब वो सब कामुक हो गईं, जैसे वो ‘आशीर्वाद’ अब कुछ और मतलब रखता हो।

अगले दिन से मैंने फैसला किया, मैं उन्हें सिड्यूस करूँगी, क्यों, क्योंकि वो उत्तेजना मुझे खा रही थी, जैसे कोई नशा, मैं जानबूझकर ऐसी साड़ियाँ चुनने लगी जो पारदर्शी हों, कर्व्स दिखाएँ, ब्रेकफास्ट पर उनके पास बैठती, झुककर चाय डालती ताकि क्लिवेज झलके, दादा जी की आँखें चमकतीं, लेकिन वो चुप रहते, सिर्फ साँसें तेज, मैं उनके चेहरे पर वो भूख देखती और अंदर से जल उठती, एक शाम फैमिली डिनर पर, टेबल के नीचे मेरा पैर ‘गलती से’ उनके पैर से टकराया, मैंने रगड़ा धीरे-धीरे, उनकी आँखें चौड़ी हुईं, लेकिन वो हिले नहीं, मैंने महसूस किया उनका उभार, मन में सोचा, दादा जी, आपकी ये हिचकिचाहट मुझे और गर्म कर रही है।

r/DesiRandi_ - संडे वाइब F20

दोपहर की वो घटना, घर सूना, किचन में मैं सब्जी काट रही थी, गर्मी से पसीना बह रहा, साड़ी चिपक गई बॉडी से, दादा जी पानी पीने आए, मैंने पल्लू गिरा दिया ‘गलती से’, बूब्स आधे नंगे, निप्पल्स सख्त, “ओह सॉरी दादा जी,” मैंने धीमी, सेक्सी आवाज में कहा, लेकिन ठीक करने में देर की, उनकी साँसें तेज, आँखें चिपकीं, पैंट में तंबू, मैं मुस्कुराई, उनके हाथ पर पानी का ग्लास रखा लेकिन ‘स्लिप’ से गीला कर दिया, फिर कपड़े से पोंछा, मेरी उंगलियाँ उनकी त्वचा पर रेंगतीं, मुस्की गंध आ रही थी उनकी, मर्दाना, मैं चली गई लेकिन कमरे में जाकर फिर उंगली की, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. दादा जी, काश आप यहाँ होते।

दिन गुजरते गए, मैं छेड़छाड़ बढ़ाती गई, रात को उनके रूम में मसाज ऑफर करती, “दादा जी, आप थक गए होंगे,” कहकर ऑयल लगाती पीठ पर, हाथ नीचे सरकते, कमर तक, उनकी कराहें दबी हुईं, एक बार उनका हाथ मेरी कमर पर आया ‘एक्सीडेंटल’, लेकिन उंगलियाँ सहलाईं, जैसे टेस्ट कर रहे हों, मैंने पलटकर देखा, “दादा जी, ये आपका आशीर्वाद है ना,” फुसफुसाया, उनकी आँखों में आग, लेकिन रुके, मेरी चूत हर वक्त गीली, रस से भरी, सोचती कि कब वो टूटेंगे, रातों को मास्टरबेट करती, कल्पना में दादा जी का लंड, मोटा, मेरी चूत में, आह इह्ह ओह्ह ओह.. आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. क्लाइमैक्स पर क्लाइमैक्स, लेकिन असली चाहत बाकी।

फिर वो फैमिली फंक्शन का दिन, घर में मेहमान, शोर, संगीत, हँसी-मजाक, मैंने ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी, ब्लाउज टाइट, ब्रा नहीं, निप्पल्स उभरे हुए, दादा जी पूरे समय घूरते, उनकी नजरें मेरे बूब्स पर चिपकीं, डांस फ्लोर पर मैं नाची, बॉडी हिलाई ताकि वो देखें, हमारी आँखें मिलीं रिश्तेदारों के बीच, वो सार्वजनिक लेकिन प्राइवेट इशारा, दिल तेज धड़का, शाम को सब व्यस्त, मैंने इशारा किया, छत पर चली गई, ठंडी हवा, नीचे पटाखों की रोशनी।

दादा जी पीछे आए, “नंदिनी, ऊपर क्या काम है?” फुसफुसाते हुए, साँसें तेज, मैंने आँख मारकर कहा, “दादा जी, आपकी वो चुपके वाली नजरें मेरी चूत गीली कर देती हैं, घूरते क्यों हो ऐसे, जैसे चोदना चाहते हो,” वो हकबकाए, “बेटी, ये पाप है,” लेकिन लंड जाँघ पर दबा, सख्त, मैंने रगड़ा, “पाप ही सही, दादा जी, मुझे आपका मोटा लंड चाहिए, आशीर्वाद के नाम पर चोदो ना मुझे,” उनके होंठों पर होंठ रखे, दाढ़ी गुदगुदाई, मुस्की गंध, जीभ घुसी, चूसी, उनका हाथ साड़ी में, चूत सहलाई, आह इह्ह ओह्ह.. उंगली डाली, गीली चूत की आवाजें।

घुटनों पर बैठी, पैंट खोला, लंड बाहर, बड़ा, मोटा, वीर्य से गीला, मुँह में लिया, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग.. डीपथ्रोट, गले तक, प्री-कम नमकीन, वो कराहे, “नंदिनी, तू रंडी जैसी चूस रही है,” बाल पकड़े, थ्रस्ट, लेकिन मैं रुकी, बाहर निकाला, चाटा, टेंशन बढ़ाई, फिर शुरू, दीवार के सहारे खड़ी की, साड़ी ऊपर, पैंटी साइड, लंड घुसेड़ा, “आह दादा जी, आपका लंड मेरी चूत फाड़ रहा है, जोर से पेलो,” आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, धक्के जोरदार, बूब्स दबाए, निप्पल्स मसले, चूसे, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई..।

नीचे फंक्शन, संगीत में कराहें दबीं, डॉगी में किया, गांड पर थप्पड़, “नंदिनी, मेरी छोटी नंदू, अब तू मेरी रंडी बन गई,” लंड चूत को चीरता, मैं ऑर्गेज्म पर, रस बहता, फिर मिशनरी, टांगें फैलाईं, आँखों में देखते, “ले मेरा आशीर्वाद, नंदिनी,” जीभ बूब्स पर, पटाखों की रोशनी में क्लाइमैक्स सिंक, आखिर वीर्य अंदर, गर्म बाढ़, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, हम पसीने से तर, उसके बाद रिश्ता बदल गया, अब हर मौके पर दादा जी मुझे चोदते, वो आशीर्वाद कभी नहीं भूलूँगी।

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