बेटे के लुल्ली को लौड़ा बनाया माँ ने 1 – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Mom son sex story – Blowjob sex story: आज सुबह से प्रतिमा का मूड बिगड़ा हुआ था, वह खुद नहीं जानती थी कि वजह क्या थी। पूरे घर में ऐसी शांति थी कि हर चीज से नीरसता झलक रही थी। तीन बेडरूम वाला घर काफी बड़ा था, लेकिन उस उदासी और सन्नाटे में वह और भी विशाल लग रहा था।

प्रतिमा का मन किसी काम में नहीं लग रहा था, सिर में हल्का दर्द भी था, शायद रात भर न सो पाने की वजह से। पिछले दिन वह पूरे घर की सफाई में व्यस्त रही थी, उसे लगा था कि रात को अच्छी नींद आएगी, लेकिन थकान और बदन दर्द के बावजूद वह सो नहीं पाई और पूरी रात करवटें बदलती रही।

प्रतिमा का पति अतुल पिछले हफ्ते से दूसरे शहर में था। वह एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में जूनियर इंजीनियर था। अच्छी सैलरी की वजह से वह किसी काम से मना नहीं करता था, इसलिए इस बार दूसरे शहर के प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने उसे चुना।

प्रोजेक्ट मैनेजर ने उसे सैलरी बढ़ाने का वादा किया था और अतुल जानता था कि वह अपनी बात का पक्का है। उसे खुशी थी कि सैलरी बढ़ जाएगी, लेकिन साथ ही पत्नी की नाराजगी की चिंता भी सता रही थी। उसने प्रतिमा को घुमाने ले जाने का वादा किया था, उसे मनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ी थी, कई वादे और लालच देने पड़े थे तब जाकर उसका गुस्सा शांत हुआ था।

प्रतिमा ने अंत में यह सोचकर मन मान लिया कि पति की सैलरी बढ़ने वाली है। वह अपने बेटे रिशु को नाश्ते के लिए आवाज देती है, लेकिन कोई जवाब नहीं आता। दो-तीन बार पुकारने पर भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उसकी खीझ बढ़ गई।

वह रसोई से सीढ़ियां चढ़ती हुई ऊपर जाती है, मन ही मन बड़बड़ाती हुई, “इसने तो नाक में दम कर रखा है, न पढ़ाई करता है, न घर के काम में मदद, सारा दिन खेल-कूद और टीवी।” दरवाजा जोर से खोलती है तो सामने रिशु गहरी नींद में खर्राटे भर रहा था।

“सुबह के दस बजने वाले हैं और यह साहब अभी तक सो रहे हैं,” वह चादर जोर से खींचती है। रिशु हड़बड़ा कर उठता है, आंखें अभी पूरी नहीं खुली थीं इसलिए माँ के चेहरे पर छाया गुस्सा नहीं देख पाया।

“क्या मम्मी, इतनी सुबह क्यों जगाया, मुझे और सोना है,” रिशु शिकायत भरे स्वर में बोला।

“इतनी सुबह? दस बजने वाले हैं और अभी सोना है, हाथ-मुंह धोकर नीचे आओ, नाश्ता लगा रही हूं,” प्रतिमा तीखे स्वर में बोली।

“मुझे नाश्ता नहीं करना, आप जाइए, मुझे सोने दीजिए,” रिशु चादर खींचने की कोशिश करता है। प्रतिमा उसका हाथ झटक कर एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर मार देती है। थप्पड़ की आवाज से रिशु की आंखें पूरी खुल जाती हैं और उसे माँ का भयानक गुस्सा दिखाई देता है।

“अभी बिस्तर से उठो, हाथ-मुंह धोओ, दस मिनट में नीचे नाश्ते की मेज पर होना चाहिए, आज से मेरी इजाजत के बिना न खेलने जाओगे, न टीवी देखोगे, हर रोज समझाने से मेरा दिमाग खराब होता है और तुम्हें कुछ समझ नहीं आता, अब जिस भाषा में समझ आएगी उसी में समझाऊंगी,” प्रतिमा चिल्लाते हुए बोली।

रिशु सिर झुकाए बैठा था, एक हाथ से लाल हुए गाल को सहला रहा था। “दस मिनट, याद रखना वरना…” कहकर प्रतिमा पैर पटकते हुए कमरे से निकल गई और दरवाजा जोर से बंद कर दिया।

प्रतिमा के जाते ही रिशु बाथरूम में घुस गया। ब्रश करते हुए वह सोच रहा था कि माँ का मूड आज इतना क्यों खराब है। थप्पड़ से ज्यादा दुख इस बात का था कि आज क्रिकेट नहीं खेल पाएगा, एक्सबॉक्स तो दूर की बात है।

माँ के गुस्से से वह अच्छी तरह वाकिफ था, पापा भी डरते थे। अब सारा दिन किताबों में गुजारना पड़ेगा। मुंह पर पानी के छींटे मारते हुए वह सोच रहा था कि माँ को कैसे खुश करे, अगर खुश हो गई तो सजा जल्दी खत्म हो सकती थी।

दस मिनट होने को थे, वह तौलिया लेकर बाहर आया, लेकिन फिर पेशाब करने की सोचकर जिप खोलकर अपना सोया हुआ लंड बाहर निकाला। प्रेशर ज्यादा नहीं था, इसलिए पंद्रह-बीस सेकंड हिलाना पड़ा तब धार निकली।

बारह मिनट हो चुके थे, वह जिप पकड़कर तेजी से भागा और जिपर ऊपर खींचने लगा, तभी गलती हो गई। भागने से लंड थोड़ा जाग गया था, झटके से बाहर आ गया और तेजी से जिपर ऊपर खींच दी।

अगले ही पल उसका पैर थम गया, मुंह खुल गया और एक खामोश चीख निकली। तीव्र दर्द से वह बिलबिला उठा। लंड की नर्म त्वचा जिपर में फंस गई थी, कम से कम पांच दांतों ने कस लिया था।

दर्द तो था ही, ऊपर से माँ का डर। मदद करने वाला कोई नहीं था और अगर होता भी तो वह शर्म से मांगता नहीं। जिपर हिलाने की कोशिश की तो दर्द की लहर पूरे शरीर में फैल गई।

घड़ी तेजी से चल रही थी, माँ ऊपर आने वाली थी। उसने दोनों हाथों से जिपर को विपरीत दिशा में खींचा, आंखें बंद की और जोर से झटका दिया।

“आआआह्ह्ह्ह मम्मी!” वह पीड़ा से चीख पड़ा, सांस रुक गई।

नीचे प्रतिमा नाश्ता लगा रही थी, उसका मूड और बिगड़ चुका था। बीस मिनट हो गए थे और रिशु नहीं आया था। तभी रिशु की दर्द भरी चीख गूंजी। प्रतिमा का दिल बैठ गया, वह चीखती हुई ऊपर दौड़ी, “बेटा क्या हुआ, मैं आ रही हूं!”

पल भर में वह कमरे में थी। बाथरूम के दरवाजे पर रिशु जांघों पर हाथ रखे गहरी सांसें ले रहा था, चेहरा दर्द से सफेद।

“मम्मी मेरी लुल्ली… हुंह… हुंह…” वह सुबकने लगा, आंखों से आंसू बहने लगे, “मम्मी मेरी लुल्ली पेंट की चेन में फंस गई, बहुत दर्द हो रहा है।”

प्रतिमा दौड़कर उसके पास घुटनों पर बैठ गई, उसके हाथ हटाए। रिशु का लंड पेंट से बाहर था। उसने ध्यान से देखा, लेकिन ठीक से दिख नहीं रहा था। धीरे से अंगूठे और तर्जनी से लंड ऊपर उठाया।

“आह मम्मी,” रिशु तिलमिला उठा।

“सॉरी बेटा, थोड़ा देखने दो,” प्रतिमा बहुत कोमलता से लंड ऊपर उठाती है। अब दिखा कि दो दांत अभी भी त्वचा में फंसे थे, आसपास जिपर के निशान और लालिमा थी। उसने पहले खुद आजाद करने की कोशिश की थी और कुछ हद तक सफल भी हुआ था।

प्रतिमा ने जिपर का हैंडल कांपते हाथों से पकड़ा और बहुत धीरे नीचे खींचने लगी। जैसे ही हल्का दबाव दिया, रिशु सिसकने लगा।

“उफ्फ अब क्या करूं, तुम हर दिन नई मुसीबत खड़ी करते हो,” प्रतिमा खीझकर बोली। उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे।

“आपकी गलती है, सुबह-सुबह डांटने लगीं, छुट्टियों में भी मजा नहीं करने देतीं,” रिशु भड़ास निकालता है। प्रतिमा चुप हो गई।

वह सोचने लगी, सच में उसकी डांट से घबराहट में ऐसा हुआ, उसका इसमें क्या दोष। छुट्टियां तो साल में एक बार आती हैं। उसने ठंडी सांस ली, अब एक ही रास्ता था।

“छुट्टियां होने का मतलब सिर्फ मौज करना नहीं, न पढ़ाई, न मदद, सारा दिन बाहर,” प्रतिमा बोली।

“सभी दोस्त खेलते हैं, किसी की माँ नहीं रोकती, बस आप ही… आह्ह्ह्ह्ह्ह!” अचानक रिशु चीख पड़ा।

प्रतिमा ने बातों में उलझाकर अचानक जिपर खोल दी थी। वह खड़ी होकर उसके सिर पर हाथ फेरती है, “बस बेटा, अब हो गया, अब दर्द नहीं होगा।”

“उफ्फ मेरी जान निकल गई, आप माँ हो या दुश्मन,” रिशु बोला। दर्द कम हुआ था लेकिन अभी भी था।

“बेटा क्या करती, दूसरा उपाय नहीं था, थोड़ी देर सहन करो, दर्द चला जाएगा,” प्रतिमा उसके गालों से आंसू पोंछती है। बेटे को तकलीफ में देख उसका दिल पिघल रहा था।

“नहीं सहन हो रहा माँ, ऐसा लग रहा है जैसे काट दिया हो,” रिशु सिसकता है।

प्रतिमा फिर घुटनों पर बैठी, लंड को कोमलता से थामा। अब जिपर से आजाद था। उसने नीचे की त्वचा देखी, लाल हो चुकी थी, जिपर के निशान साफ थे। अंगूठे से बहुत नरमी से सहलाया।

“आह्ह माँ जल रहा है,” रिशु सिसकता है।

प्रतिमा एक बार घायल जगह देखती है, फिर रिशु के भोले चेहरे को जो आंसुओं से गीला चमक रहा था। फिर उसके नर्म होंठ उस घायल त्वचा पर रख दिए।

“उंह्ह्ह्ह,” रिशु धीरे से आह भरा।

प्रतिमा के कोमल होंठ जगह-जगह चूम रहे थे, पुच-पुच की आवाजें करते हुए। रिशु को नर्म स्पर्श बहुत अच्छा लगा, राहत मिली।

“हां मम्मी, अब थोड़ा अच्छा लग रहा है,” रिशु बोला। प्रतिमा मुस्करा उठी। पुरुष को लंड पर औरत के होंठों का स्पर्श हमेशा सुखद लगता है, चाहे वह माँ ही क्यों न हो।

उत्साहित होकर प्रतिमा तेजी से चूमने लगी। कुछ ही पलों में रिशु उस सुख में डूब गया।

“आह्ह मम्मी, दर्द कम हो रहा है, ऐसे ही करती रहो,” रिशु बोला। प्रतिमा ने लंड ऊपर उठाया और जड़ से टोपे तक चुम्बनों की बरसात कर दी। फिर होंठ खोले, जीभ बाहर निकाली और घायल जगह सहलाने लगी।

गीली जीभ का स्पर्श होते ही रिशु सिसक उठा, “इह्ह्ह्ह मम्मी।” प्रतिमा की जीभ तेजी से चलने लगी।

“अह्ह्ह्ह मम्मी, बहुत अच्छा लग रहा है, बहुत मजा आ रहा है,” रिशु की लंबी सिसकी निकली, अब आनंद की। दर्द वह भूल चुका था।

प्रतिमा मुस्कराई, जीभ अब पूरे नीचे के हिस्से पर घूम रही थी। अचानक उसे लगा कि लंड हिल रहा है, आकार बढ़ रहा है।

“उफ्फ यह तो खड़ा हो रहा है,” वह मन में बोली। एक पल को लगा छोड़ दे, लेकिन अगले ही पल विचार त्याग दिया। बेटा तकलीफ में है, उसे राहत देना उसका फर्ज है।

रिशु कराह रहा था, लेकिन मजा की कराह। लंड अब साढ़े छह इंच का कड़क हो चुका था। प्रतिमा की जीभ तेज चल रही थी, उसका बदन गर्म हो रहा था, निप्पल कड़े, चूत में रस।

वह उत्तेजना छिपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन काबू खो रही थी। लंड पूरी तरह कड़क था, लोहे जैसा। प्रतिमा ने होंठों में लिया और जीभ रगड़ते हुए चूसने लगी।

रिशु का आनंद कई गुना बढ़ा, “अह्ह्ह-अह्ह्ह मम्मी उफ्फ्फ।” उसके हाथ माँ के सिर पर कस गए।

प्रतिमा जोश में आ गई, होंठ ऊपर की ओर बढ़े, सुपाड़े को होंठों में कस लिया और जीभ चलाई। रिशु झटका खाकर कराहा, “आआह्ह्ह मम्मी।”

प्रतिमा तेजी से चूसने लगी, एक हाथ कमर पर, दूसरा अंडकोष सहलाने लगा। मुंह आगे-पीछे होने लगा। रिशु भी कमर हिलाकर माँ का मुंह चोदने लगा।

लंड गले को छूता तो “ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग…” की आवाज निकलती। रिशु आंखें बंद किए धक्के मार रहा था। प्रतिमा को तकलीफ हो रही थी, लेकिन कोशिश कर रही थी।

जल्दी ही रिशु को लगा वह झड़ने वाला है, धक्के तेज कर दिए। प्रतिमा अब सिर्फ होंठ और जीभ से सहला रही थी, खुद टांगें रगड़ रही थी, चूत गीली हो चुकी थी।

अचानक रिशु कराहा, “ओह्ह्ह मम्मी आह्ह्ह्ह्ह,” और वीर्य की धाराएं गले में टकराईं। प्रतिमा धीरे-धीरे गटकने लगी।

वीर्य खत्म होने पर उसने लंड बाहर निकाला, मुट्ठी से दबाकर बाकी निकाला और जीभ से चाट लिया। फिर पूरा लंड चाटकर साफ किया, सुपाड़े को फिर चूसा और जोरदार चुंबन लिया।

“ओह्ह्ह मम्मी,” रिशु सिसक रहा था।

प्रतिमा ने उसके हाथ हटाए जो बाल खींच रहे थे। “सॉरी मम्मी,” रिशु बोला।

“कोई बात नहीं बेटा, उम्मीद है अब दर्द नहीं है।”

“हां मम्मी, अब नहीं है,” रिशु हकलाया।

“अच्छा, नीचे आना, नाश्ता गर्म करती हूं, फिर से जिपर में न फंस जाए,” प्रतिमा बोली और बाहर निकल गई।

रिशु समझ नहीं पाया, लेकिन उसकी कंपकंपाती आवाज में वासना थी।

डाइनिंग टेबल पर दोनों चुपचाप खा रहे थे। रिशु माँ को देखने की हिम्मत नहीं कर रहा था। एक तरफ आनंद की लहरें, दूसरी तरफ समझ नहीं आ रहा था क्या हुआ।

प्रतिमा सिर्फ अपनी चूत की आग के बारे में सोच रही थी। रिशु संतुष्ट था, लेकिन वह जल रही थी। चाहती थी रिशु ऊपर जाए और वह खुद को शांत कर ले। टांगें रगड़ रही थी, लेकिन उत्तेजना बढ़ रही थी।

रिशु खाना खत्म कर ऊपर चला गया। प्रतिमा बर्तन रखकर अपने कमरे में गई, कपड़े उतारे और बाथरूम में ठंडे पानी के नीचे खड़ी हो गई।

एक हाथ निप्पल मसल रहा था, दूसरा चूत में उंगली। “आह्ह्ह ओह्ह्ह,” कराहें निकल रही थीं। उंगली तेज चली और दो मिनट में वह झड़ गई।

हैरान थी कि इतनी जल्दी कभी नहीं हुई। शायद आज ज्यादा गर्म थी, या बेटे से रिश्ते की मर्यादा उत्तेजना बढ़ा रही थी।

नहाकर बेड पर लेटी, अब दिमाग शांत था तो सोचने लगी क्या किया। सब सच था, बेटे का लंड मुंह में लिया, वीर्य पिया। खुद को कोस रही थी, लेकिन क्यों ऐसा हुआ?

पति के प्लान कैंसिल होने से, महीनों की दबी इच्छाएं। पति थक जाता था, पूरी रात नहीं चोद पाता। आठ साल पहले कुलु-मनाली में महीना बिताया था, तब खूब चुदाई हुई थी। अब सब सपना टूट गया।

शायद इसलिए काबू नहीं रख पाई, बेटे का तगड़ा लंड देखकर बहक गई।

अचानक सपना देख रही थी कि बेटा पीछे से चोद रहा है, जोरदार धक्के, “आह्ह्ह ऊफ्फ्फ,” वह कराह रही थी। पीछे मुड़ी तो बेटा था, “नहीं!” चीखकर उठी।

दोपहर के दो बज रहे थे। रिशु को खाना देना था। शीशे के सामने बैठी, खुद को निहारा। अभी भी इतनी सुंदर कि किसी को भी पागल कर दे। निप्पल कड़े थे, चूत गीली।

उंगली डाली तो रस से भीगी। आंखें बंद कीं और बेटे का लंड याद आया, कितना मोटा-कड़क। कल्पना की कि चूत में जाएगा तो क्या होगा, “आआह्ह्ह।”

डरकर उठी, खुद पर काबू करने की सोच रही थी। टी-शर्ट और पायजामा पहना, ब्रा-पैंटी नहीं। टी-शर्ट टाइट थी, निप्पल दिख रहे थे, नाभि खुली थी।

रसोई में गई। रिशु पढ़ाई कर रहा था, माँ को खुश करने के लिए। वह अब समझदार था, इंटरनेट से सब जानता था, लेकिन अनुभव नहीं। आज पहली बार हुआ, समझ नहीं पा रहा था माँ ने मजा लिया या सिर्फ मदद की।

लेकिन मजा जबरदस्त था। माँ की आखिरी बात याद आई, “लुल्ली नहीं, लौड़ा बन गया है।”

नहाकर भूख लगी, लेकिन माँ के सामने जाने में शर्म। तभी बेल बजी, दोस्त वैभव आया। माँ से बात कर रहा था, रिशु की नजर नहीं उठा रहा था, माँ के बदन को घूर रहा था।

रिशु गुस्से में आ गया, वैभव को डांटकर भगा दिया, दोस्ती खत्म। प्रतिमा हंसते-हंसते रसोई में गई।

रिशु पानी पीने आया, प्रतिमा मुस्कराई। “बेटा ऑमलेट सैंडविच बना रही हूं, कुछ और?”

“नहीं मम्मी, वही पसंद है।”

टेबल पर आमने-सामने बैठे। प्रतिमा बोली, “खेलने जाना चाहो तो जाओ, लेकिन पढ़ाई भी करो।”

“सॉरी माँ, अब गलती नहीं होगी, घर में रहकर पढ़ाई और मदद करूंगा।”

प्रतिमा हैरान, “सच में?”

“हां मम्मी, आप अकेली रहती हो, कंपनी मिलेगी, मुझे आपके साथ अच्छा लगता है।”

प्रतिमा खुश हुई, आगे झुककर हाथ थामा, मम्मे दिख रहे थे। रिशु का लंड खड़ा हो गया।

“मुझे भी तुम्हारे साथ अच्छा लगता है बेटा।”

खाना खत्म कर प्रतिमा बर्तन धोने लगी, रिशु मदद करने आया। “टीवी लगाओ, मूवी देखेंगे।”

फिर अचानक बोली, “सुबह जो हुआ, प्लीज किसी से मत कहना।”

रिशु अनजान बना, “सुबह क्या हुआ? बस जगाया था नाश्ते के लिए।”

प्रतिमा समझ गई, राहत मिली। आगे बढ़कर गाल पर किस किया, जीभ फेरी, पेट पर लंड दबाया।

“शुक्रिया बेटा, अगर ऐसे समझदार रहे तो छुट्टियों में बहुत मजा आएगा,” कान में फुसफुसाई।

रिशु उत्तेजित, टीवी लगाने गया। प्रतिमा मुस्कराई, अब तय था कि बेटे से चुदवाएगी, हर दिन, हर रात। उसका तगड़ा लौड़ा उसकी चूत में जाएगा, दोनों एक-दूसरे की जरूरतें पूरी करेंगे।

दोस्तों, प्रतिमा ने कैसे रिशु से चुदवाया, अगले भाग में…

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