पक्की सहेली ने मेरे पति का मोटा लंड देखा और ललचा गई1 min read

Best friend fucked by husband sex story – Husband wife swap sex story: हैलो दोस्तों, मेरा नाम सोनम है, फिगर 40-34-38, भारी-भरकम मम्मे और मटकती हुई गोल गाँंड, शादी को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए थे जब ये सब हुआ। मेरी सबसे पक्की सहेली सविता की शादी भी मुंबई में ही हुई थी, कॉलेज टाइम से हम दोनों एक-दूसरे की हर गंदी बात शेयर करती थीं। शादी के बाद हमने जानबूझकर एक ही सोसाइटी में बगल के फ्लैट ले लिए, ताकि पति ऑफिस जाएँ तो हम दोनों दिन भर मस्ती करें।

सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक हमारा रूटीन था, कभी मेरे घर, कभी उसके घर, चाय पीते-पीते बातें चुदाई तक पहुँच ही जाती थीं।

एक दिन सविता मेरे घर आई, स्कर्ट-टॉप में उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, बैठते ही बोली, “यार कल अंकित ने मुझे मार-मार के चोदा, आज तक चूत में जलन हो रही है।”

मैंने हँसते हुए पूछा, “क्या किया साले ने?”

“वो कोई नया मोटा-डॉटेड कंडोम लाया था, उभरे हुए दाने जैसे, पहले तो घुस ही नहीं रहा था, फिर ढेर सारा तेल लगाकर जब जोर से ठोका तो लगा मेरी चूत फट जाएगी, आह्ह्ह… आज तक दर्द है और खुजली भी।”

मैंने मजाक में उसकी स्कर्ट ऊपर उठाई और पैंटी के ऊपर से सहलाते हुए बोली, “देखूँ तो सही कितना निशान पड़ा है।”

सविता ने पैर फैला दिए, पैंटी गीली थी, मैंने उँगली से रगड़ा तो वो सिहर उठी, “आह्ह… मत कर यार, सुबह ही अंकित ने बाथटब में फिर पेला था, मना करने पर भी पीछे का छेद मार लिया, पर सच बता रही हूँ सोनम, गाँंड मारने का मजा ही अलग है, आह्ह्ह्ह… लंड एकदम अंदर तक घुस जाता है।”

मैंने तंज कसा, “कमिनी, शादी को साल भी नहीं हुआ और तूने गाँंड मारवा ली, मुझे तो बताया तक नहीं।”

वो शरमाते हुए बोली, “पहले तो मना करती थी, पर जब रोज मांगने लगा तो तरस खाकर दे दिया, पहली बार जब मारा तो दर्द के साथ इतना मजा आया कि मैं खुद ही कमर उछालने लगी, ऊईईई… अब तो हफ्ते में तीन-चार बार गाँंड ही मारता है।”

फिर बात उसके एक्स-बॉयफ्रेंड तक पहुँची, वो अभी भी चोदने आता था, पिछले हफ्ते तो दोस्त को साथ लाया था। सविता ने हँसते हुए बताया, “मैंने मना कर दिया था, पर उसका दोस्त दरवाजे पर खड़ा मेरी चुदाई देखता रहा और लंड हिलाता रहा, जाते वक्त मेरी गाँंड दबाकर बोला, अगली बार मुझे भी मौका देना भाभी।”

मैंने पूँछा, “तूने दिया क्या?”

“फिलहाल नहीं, पर सोच रही हूँ दे दूँ, बेचारा दूर से आया था मेरी चुदाई की आस लिए।”

बातों-बातों में मैंने अपनी हनीमून की पेनड्राइव निकाली, जिसमें मयंक का 8 इंच का मोटा लंड मेरी चूत और गाँंड में धँस रहा था। सविता की आँखें फटी की फटी रह गईं, “बाप रे! इतना बड़ा? तू कैसे लेती है?”

मैंने मुस्कुरा कर कहा, “आदत हो गई, रोज दो-तीन बार तो पेलता ही है, कभी मुँह, कभी चूत, कभी गाँंड।”

सविता ने अचानक मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोली, “सोनम… एक बार मुझे तेरी चुदाई लाइव देखनी है, प्लीज मुझे अपने बेडरूम में छिपा दे।”

मैं हिचकिचाई, पर उसकी आँखों में चुदास थी, मैं मान गई।

अगले दिन मैंने मयंक को जल्दी बुला लिया, सविता को अलमारी के पर्दे के पीछे छिपा दिया। मैंने लाल रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। मयंक आते ही मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए, दोनों नंगे होकर नहाए, मैंने उनका लंड मुँह में लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… पूरा गले तक ले लिया, मयंक की साँसें तेज हो गईं।

बाहर बेड पर आए तो मयंक ने मुझे घोड़ी बनाया, आज उन्होंने भी वही मोटा डॉटेड कंडोम चढ़ाया था। जैसे ही लंड चूत में घुसा, जलन हुई, आह्ह्ह्ह… मैंने करवट बदल कर मुँह में ले लिया, पर वो और जोश में आ गए, मुझे फिर घोड़ी बनाया और जोर-जोर से ठोकने लगे, ठप-ठप-ठप… मेरी चूचियाँ लहरा रही थीं, मैं बार-बार सविता की तरफ देख रही थी, वो पर्दे के पीछे से अपनी चूत सहला रही थी, उसकी साँसें सुनाई दे रही थीं।

मैंने मयंक से बोला, “आज चूत में बहुत जलन हो रही है, बाकी गाँंड में कर लो।”

मयंक ने खुश होकर मेरी कमर पकड़ी और एक ही झटके में गाँंड में घुसा दिया, आह्ह्ह्ह्ह… ऊईई माँ… मैं चीख पड़ी, पर मजा भी इतना था कि मैं खुद पीछे को धक्के मारने लगी, ठपठपठपठप… कमरा हमारी चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था।

अचानक मयंक को शक हुआ, वो लंड निकाल कर उठे और पर्दा हटाया, सविता नंगी खड़ी थी, उसकी चूत से पानी टपक रहा था।

मयंक मुस्कुराए और मुझे बाहर ले गए, टीवी रूम में बैठ कर पूछा, “बता क्या माजरा है?”

मैंने सब बता दिया। मयंक हँसे, “तो तेरी सहेली को भी चुदाई का शौक है? अगर तू राजी है तो मुझे क्या एतराज, नई चूत मिलेगी, वो भी बगल में रहती है, जब मन करे तब चोद लूँगा।”

मैं चौंकी, पर अंदर से गर्मी भी हुई। शाम को सविता का फोन आया, “क्या हुआ?”

मैंने बताया तो वो बेसब्री से बोली, “प्लीज सोनम, एक बार मयंक से चुदवा दे, मैं भी तुझे अंकित से चुदवा दूँगी।”

मैंने मयंक से बात की, वो तुरंत राजी हो गए। हमने प्लान बना लिया, पहले सविता को मयंक चोदेंगे, फिर मैं अंकित को लूँगी।

बस दोस्तों, अब अगले पार्ट में बताऊँगी कैसे मयंक ने सविता की चूत और गाँंड दोनों एक साथ मारी और मैं बगल में देखती रही, कैसे हम दोनों सहेलियाँ एक ही लंड पर सवार हुईं। लंड-चूत हिलाते रहो, अगली कहानी जल्दी आएगी।

कहानी का अगला भाग: मेरे पति की रखैल बन गई मेरी पक्की सहेली

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