Office Gangbang sex story: ट्रिप के आखिरी दिन यूसुफ ने सुबह मुझे अपनी बाहों में जकड़कर कहा, “आज शाम बड़ा क्लाइंट मिलने वाला है, चार बड़े लोग हैं, डील बहुत बड़ी है, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा उनके फार्महाउस पर।” मैंने कुछ समझा नहीं, लेकिन उसकी आँखों में वो ही दबंग चमक थी, तो मैंने हाँ कह दी। दिन भर मीटिंग्स हुईं, मैं नोट्स लेती रही, लेकिन मेरी चूत में हर वक्त हल्की सी जलन बनी रही, जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो।
कहानी का पिछला भाग: संस्कारी से रंडी बनने की यात्रा – 5
शाम को यूसुफ ने मुझे अपनी चुनी हुई लाल साड़ी पहनने को कहा, ब्लाउज गहरा कट वाला, और अंदर कुछ न पहनने को हुक्म दिया। मैं शर्मा गई, लेकिन उसकी नजरों के सामने मना नहीं कर पाई, ब्रा और पैंटी नहीं पहनी। साड़ी में स्तन उभरे हुए थे, निप्पल्स कपड़े पर रगड़ खा रहे थे, और नीचे हवा लगते ही चूत सिहर रही थी, रस की बूंदें जाँघों पर बहने लगीं।
फार्महाउस दूर शहर से बाहर था, बड़ा गेट, अंदर हरा बगीचा, स्विमिंग पूल, और एक बड़ा हॉल। चार क्लाइंट्स पहले से बैठे थे—सब मोटे तगड़े, उम्र चालीस से ऊपर, मूंछें, दाढ़ियाँ, मर्दाना पसीने और इत्र की तेज गंध से भरे हुए, उनकी नजरें भूखी थीं। यूसुफ ने मुझे उनके सामने पेश किया, “ये मेरी सेक्रेटरी निशिता है, आज ये आप सबकी सस्ती रंडी बनेगी, जो मर्जी करो।” सबकी नजरें मेरे बदन पर रुक गईं, स्तनों पर, कमर पर, और मैं शर्मा कर सिर झुका लिया, लेकिन चूत में रस टपकने लगा, पैंटी न होने से जाँघें तर हो गईं। डिनर हुआ, शराब पी, सबकी आँखें लाल हो गईं, और फिर यूसुफ ने कहा, “निशिता, इन सबको खुश करो, एक गंदी आइटम डांस करो, अपनी चूत और गांड दिखाकर।” मैं चौंकी, लेकिन उसकी नजरों में हुक्म था। म्यूजिक चला, पुराना गंदा गाना “चिकनी चमेली”, और यूसुफ ने मेरे पल्लू खींच लिया। मैं नाचने लगी, साड़ी घूम रही थी, स्तन उछल रहे थे, निप्पल्स सख्त होकर दिख रहे थे। सब तालियाँ बजा रहे थे, सीटियाँ मार रहे थे, “वाह साली… नाच… चूत मटका…” मैंने ब्लाउज के हुक खोले, ब्लाउज गिर गया, स्तन खुले, हवा लगते ही निप्पल्स और सख्त, सब चिल्लाए, “देखो ये रंडी के मम्मे…” मैं नाचती रही, साड़ी सरकाई, पेटीकोट गिराया, अब पूरी नंगी खड़ी थी, मेरी गोरी त्वचा रोशनी में चमक रही थी, चूत के बाल गीले होकर चिपके हुए, रस जाँघों पर बह रहा था, गांड मटकाते वक्त सबकी आँखें उस पर टिक गईं। “कितनी गंदी रंडी है… चूत से रस टपक रहा है…” सब हँस रहे थे, मैं घूमी, स्तन हिलाए, गांड मटकाई, चूत पर हाथ फेरकर दिखाया, और खुद को पूरी तरह उनके सामने सौंप दिया, मेरी चूत से रस की गंध हॉल में फैल गई।
यूसुफ ने कहा, “अब एक एक करके इनकी गंदी चुदाई करो, अपनी चूत और मुँह इनके लौड़ों से भरवाओ।” पहला क्लाइंट आया, मोटा सा, मूंछ वाला, उसने मुझे सोफे पर लिटाया, मेरे मुँह में अपना मोटा लौड़ा ठूँस दिया, गंदी गंध आ रही थी, वो गले तक घुसेड़ रहा था, “चूस साली… अपनी संस्कारी मुँह से मेरे लौड़े को साफ कर,” मैं ग्ग्ग्ग… गों गों… करती चूसती रही, थूक बह रहा था, आँसू बह रहे थे, फिर वो चूत में घुसा, जोर जोर से ठोका, मेरे स्तनों को मसलता रहा, निप्पल्स मरोड़ता रहा, “कितनी टाइट चूत है रंडी… तेरे पति ने कभी नहीं ठोका क्या?” मैं चीख रही थी, “आह्ह… हाँ… ठोको… फाड़ दो…” वो कोख में झड़ा, गर्म रस भर दिया। दूसरा आया, दाढ़ी वाला, मुझे घोड़ी बनाया, गांड पर जोरदार चाँटे मारे, “तेरी गांड लाल करूँगा साली,” जलन फैल गई, फिर पीछे से घुसा, बाल खींचकर ठोका, लौड़ा चूत की दीवारें रगड़ रहा था, “बोल… मेरी रंडी है तू,” मैं बोली, “हाँ… आपकी रंडी… गांड मारो…” वो हँसा, और गांड में उंगली डालकर साथ साथ ठोका, मैं सिसक रही थी, रस बह रहा था। तीसरा मुझे गोद में उठाकर ठोका, स्तनों को चूसता रहा, निप्पल्स काटे, दाँतों के निशान पड़ गए, “तेरे मम्मे चूस चूसकर लाल कर दूँगा,” मैं उसके गले लिपटकर चीखी, “आह्ह… चूसो… काटो…” वो मुँह में झड़ा, मैं निगल गई। चौथा सबसे गंदा था, मुझे दीवार से सटाकर खड़ा किया, टाँग ऊपर उठवाई, गहरा घुसा, गला दबाया, साँस रुक रही थी, “बोल… मेरी सस्ती रंडी है तू, तेरी चूत मेरे रस से भरी रहेगी,” मैं बोली, “हाँ… सस्ती रंडी हूँ… भर दो…” वो कोख में झड़ा, रस बहने लगा। यूसुफ आखिरी था, सब देख रहे थे, उसने मुझे फर्श पर लिटाया, सबके सामने ठोका, “देखो साले… मेरी गुलाम रंडी को कैसे ठोकता हूँ, इसकी चूत सिर्फ मेरे लिए,” और जोर जोर से धक्के मारे, फच फच की आवाजें, मैं चीख चीखकर झड़ रही थी, रस की गंध पूरे हॉल में।
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फिर सब मिलकर आए, मुझे बीच में लिटाया, एक मुँह में लौड़ा ठूँस दिया, ग्ग्ग्ग… करती चूसती रही, एक चूत में घुसा, फच फच ठुकाई, दो हाथों में लौड़े पकड़कर हिलाती रही, एक मेरे स्तनों पर रगड़ रहा था। सब तरफ लौड़े, गंदी गंध, पसीना, रस, थूक। सब बारी बारी बदलते, कोई गांड में घुसा, दर्द से चीखी लेकिन मजा आया, “आह्ह… गांड फाड़ दो…” कोई मुँह में झड़ा, निगलवाया, कोई स्तनों पर गिराया, चिपचिपा रस बह रहा था। मैं पागल हो गई, चीखती रही, “आह्ह… और… सब ठोको… मुझे गंदी रंडी बनाओ… चूत गांड मुँह सब भर दो…” सबने मिलकर मुझे तड़पाया, झड़वाया, चूत में, गांड में, मुँह में, स्तनों पर रस गिराया, मैं रस से लथपथ पड़ी थी, बॉडी पर सफेद धारियाँ, चूत से रस और वीर्य बह रहा था, गंध पूरे कमरे में, मैं खुशी से रो पड़ी।
रात खत्म होने पर सबने मुझे पैसे दिए—हर एक ने बीस हजार रुपए, कुल एक लाख, मेरे हाथ में ठूँसते हुए बोले, “तेरी गंदी खिदमत के लिए सस्ती रंडी, फिर बुलाएँगे।” मैंने पैसे लिए, शर्म और अपमान में भी चूत सिकुड़ गई।
अगली सुबह हम वापस लौटे। घर पहुँचकर अजय ने पूछा, “ट्रिप कैसी रही?” मैंने कहा, “अच्छी रही, डील पक्की हो गई।” लेकिन मेरी चूत में अभी भी उनकी गर्मी और रस की गंध थी, गांड में जलन बाकी थी।
अगले दिन ऑफिस में यूसुफ ने मुझे बुलाया, सैलरी स्लिप दी—पचास प्रतिशत हाइक। मैं खुश हो गई, लेकिन वो मुस्कुराया, “ये किसी को मत बताना, सबको पता चल जाएगा हाइक कैसे मिली है, मेरी सस्ती रंडी को क्लाइंट्स की चुदाई से।” मैं शर्मा गई, लेकिन हाँ कह दी।
अब हर हफ्ते यूसुफ मुझे अपनी गुप्त फ्लैट पर ले जाता है, वहाँ पूरा दिन मुझे गंदी तरह ठोकता है, हुक्म देता है, गुलाम बनाता है, और मैं खुश हूँ अपनी इस नई जिंदगी में, अपनी चूत और बॉडी को उसके और उसके दोस्तों के लिए खुला रखकर।
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