माहवारी में माँ की चूत में बेटे का मोटा लंड – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Maa chut massage sex story, beta ne maa ko choda sex story, maahwari me chudai sex story, mom son sex, period fucking, pussy massage sex story: ये कहानी आज से ठीक सात दिन पहले की है। मैं इसलिए ये कहानी लिख रही हूँ ताकि आप भी जान सकें कि उस दिन मेरे साथ क्या-क्या हुआ था। मैं रोजाना ऐसी कहानियाँ पढ़ती हूँ और मुझे सेक्स कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है।

मेरी उम्र अभी 36 साल है। जल्दी शादी हो गई और बच्चा हो गया। बच्चा तो बड़ा हो गया पर मैं अभी भी हॉट और खूबसूरत हूँ। आपको भी पता है कि 35 साल से ऊपर की औरत बहुत हॉट, सेक्सी, गदराया बदन वाली और खूबसूरत होती है। असल चुदाई का मजा तो 35 से 45 साल की औरत में है।

मैं खूबसूरत होने के साथ-साथ मॉडर्न हूँ। वेस्टर्न ड्रेस पहनती हूँ, ब्यूटी पार्लर जाती हूँ। सजने-सँवरने का शौक है। 34 साइज की ब्रा पहनती हूँ, कमर मेरी 32 की है, चूचियाँ बड़ी-बड़ी और सेक्सी हैं। बदन मेरा गोरा है, लंबे बाल हैं। होंठ गुलाबी हैं बिना लिपस्टिक लगाए।

तो दोस्तों, ये तो जानकारी मेरे बारे में है। पर ये भी जान लीजिए कि मैं अकेली अपने बेटे के साथ भोपाल में रहती हूँ। पति मेरा भाग गया है एक लड़की को फुसलाकर और उसी के साथ दिल्ली में रहता है। अभी मैंने केस किया है इसलिए बातचीत बंद है और मैं अकेली ही रहती हूँ।

चुदाई का मन तो सबका करता है, चाहे जो औरत रोज चुदती हो या कभी-कभी। मुझे तो चुदना बहुत अच्छा लगता है पर मैं लाचार हूँ इस समय। किसी से दोस्ती भी नहीं कर सकती। जब एक बार फ्री हो जाऊँ तो अलग-अलग उम्र के तीन-चार बॉयफ्रेंड बनाऊँगी, ताकि मोटा लंड, पतला लंड, जवान, बूढ़ा, पहलवान, सभी लंड का स्वाद ले सकूँ और अपनी हॉट और सेक्सी गीली चूत में डलवा सकूँ।

तो अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ, जिसका आपको भी इंतजार है। एक दिन की बात है, मैं मार्केट गई थी और आने में देर हो गई। खाना बाहर से ही ले आई थी। उस दिन मेरा माहवारी भी शुरू हुआ था तो पेट में, कमर में दर्द हो रहा था। हम दोनों माँ-बेटा खाना खा लिए जल्दी और मैं अपने पलंग पर चली गई सोने। उस समय रात के करीब नौ बजे थे। दिनेश मोबाइल पर क्रिकेट गेम खेल रहा था।

मैं दिनेश से बोली, “बेटा, आज मेरा पैर दबा दो, आज बहुत दर्द हो रहा है पूरे शरीर में।” उसने कहा, “माँ, आपके पैर में सरसों का तेल मालिश कर देता हूँ ताकि दर्द तुरंत खत्म हो जाए।” दिनेश ऐसा करता है जब मन करता है, वो मेरे पैर में तेल लगाकर मालिश कर देता है। और जब भी वो मालिश करता है, मुझे नींद भी अच्छी आती है और मैं उसी समय सो जाती हूँ। उस दिन भी ऐसा ही हुआ, उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट को घुटने से ऊपर कर दिया और पैरों में तेल लगाने लगा। और ना जाने कब आँख लग गई और मैं सो गई।

पर जब नींद खुली तो देखा वो मेरे ब्लाउज का हुक खोल चुका था। मेरी दोनों चूचियाँ बाहर आ गई थीं और पेटीकोट और साड़ी दोनों ही कमर के ऊपर तक थे। वो मेरे बदन को निहार रहा था और अपना लंड जांघिया से निकाल कर हाथ में लेकर हिला रहा था। नींद खुलते ही मैं तो भौचक्की रह गई कि दिनेश मेरे साथ क्या कर रहा है। पर उसे किसी बात का डर नहीं था, उसने तुरंत ही मेरे ऊपर चढ़ गया और दोनों चूचियों को मसलने लगा।

मैं उसे दूर कर रही थी, “दिनेश, ये क्या कर रहा है तू? ये ठीक नहीं है बेटा, रुक जा।” पर वो नहीं मान रहा था और मेरे होंठों को चूसने लगा। मेरे बदन को सहलाने लगा, मेरी चूचियों को मसलने लगा। थोड़ी देर तक तो मैं कहती रही, “दिनेश, ये सब ठीक नहीं है, छोड़ मुझे,” पर वो और भी ज्यादा करने लगा। आखिरकार मेरी चूत भी पानी-पानी हो गई क्योंकि मैं भी काफी समय से चुदी नहीं थी। अब मुझे भी लग रहा था कि इतने दिनों की प्यास बुझ जाए, लेकिन मन में थोड़ा संकोच था, ये मेरा अपना बेटा है, पर बदन की आग ने सब भुला दिया।

मैंने भी अब उसको कुछ नहीं कहा और दोनों पैरों को अलग-अलग फैला दी। वो बीच में आकर बैठ गया और मेरी चूत को निहारने लगा। मेरे होंठ खुद-ब-खुद दाँतों से दब रहे थे, मेरी सिसकारियाँ निकल रही थीं, मेरे तन-बदन में आग लग रही थी। मेरे होंठ लाल हो गए थे और गाल गुलाबी हो गए थे, मेरी चूचियाँ तन गई थीं, निप्पल टाइट हो गए और चूत से गरम-गरम पानी निकलने लगा था, मेरे होंठ सूख रहे थे। आह, इह्ह, ओह्ह, ओह! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. ..! ऐसी आवाजें अनायास ही मेरे मुँह से निकल रही थीं।

मैं भी चुदने को तैयार थी। पर दिनेश मेरे जिस्म के साथ खेल रहा था, मेरे बदन को महसूस कर रहा था, छू रहा था, मेरे अंगों को। ऐसा लग रहा था उसे जन्नत मिल गई है, इसलिए वो बड़े ही सिद्दत से एक-एक चीज को देख रहा था और महसूस कर रहा था। उसने मेरी चूचियों को धीरे-धीरे दबाया, निप्पलों को उँगलियों से घुमाया, फिर झुककर एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा, जीभ से चाटा, दाँतों से हल्का काटा। मैं सिहर उठी, “आह दिनेश, ऐसे मत कर, मैं पागल हो जाऊँगी।” वो बोला, “माँ, तुम कितनी सेक्सी हो, मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।” उसने मेरी चूत पर हाथ फेरा, उँगली से क्लिट को रगड़ा, मैं तड़प उठी, “ओह्ह बेटा, वहाँ मत छुओ, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई..”

फिर उसने उँगली को चूत के अंदर डाला, धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, मैं कमर उचका रही थी, “दिनेश, और तेज करो, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह।” वो दो उँगलियाँ डालकर घुमाने लगा, चूत का रस बह रहा था, माहवारी का ब्लड भी थोड़ा मिक्स हो रहा था लेकिन हमें फर्क नहीं पड़ रहा था, बस आग लगी थी। उसने चूत को चाटना शुरू किया, जीभ से क्लिट को चाटा, चूत के होंठों को चूसा, “माँ, तुम्हारा रस कितना स्वादिष्ट है,” वो बोला। मैं उसके सिर को दबा रही थी, “चाटो बेटा, और चाटो, आह इह्ह ओह्ह ओह!”

मैंने कहा, “अब तो तूने मेरे शरीर में आग लगा दी दिनेश, अब तू जल्दी बुझा इस आग को। मैं पागल हो जाऊँगी अगर जल्दी नहीं चोदा तो।” उसने भी आव देखा न ताव, तुरंत ही लंड हाथ में लिया और मेरी चूत के मुँह पर रखा, दो-तीन बार रगड़ा। मैंने अपना चूतड़ सेट कर लिया और फिर उसने एक झटके में अपना नौ इंच का लंड मेरी चूत में पेल दिया। ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मैं तो जन्नत में आ गई ऐसा लगा, इतना मोटा लंड चूत में जैसे ही गया। मैं दिनेश को चूमने लगी। वो मेरी चूचियों को पीने लगा। मेरे हाथ रगड़ता तो मैं और भी पागल हो रही थी। मैं गाँड उछाल-उछाल कर चुदवाने लगी और वो जोर-जोर से धक्के देते हुए कभी मुझे चूमता, कभी जीभ मेरे मुँह में देता, कभी चूचियाँ मसलता, कभी गाँड के छेद में अपनी उँगली डालने की कोशिश करता।

“माँ, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है, जैसे मेरे लंड को निचोड़ रही हो,” वो बोला और जोर-जोर से मुझे चोदने लगा। मैं चिल्ला रही थी, “दिनेश, और जोर से चोदो, फाड़ दो मेरी चूत को, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई.. आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह।” चूत से पच-पच की आवाज आ रही थी, लंड अंदर-बाहर हो रहा था, माहवारी का ब्लड और रस मिलकर गीला कर रहा था सब। वो मेरी कमर पकड़कर धक्के मारता, मैं पैर फैलाकर लेती, फिर वो मुझे घोड़ी बनाया, पीछे से लंड डाला, गाँड पर थप्पड़ मारे, “माँ, तुम्हारी गाँड कितनी सेक्सी है,” और जोर से पेलता। मैं चिल्लाती, “हाँ बेटा, ऐसे ही चोदो, आह इह्ह ओह्ह ओह!”

फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गई, लंड को चूत में सेट किया और ऊपर-नीचे होने लगी, चूचियाँ उछल रही थीं, वो उन्हें पकड़कर मसलता। “दिनेश, तेरा लंड कितना मोटा है, मेरी चूत भर गई,” मैं बोली। वो नीचे से धक्के मारता, “माँ, तुम चोदो मुझे, मैं तुम्हारा हूँ।” फिर कभी पीछे से, कभी आगे से, कभी घोड़ी बनाकर, कभी पैर उठाकर। उस दिन दिनेश ने मुझे दो घंटे तक चोदा, हम दोनों ही पानी-पानी हो गए थे। एक वो दिन था, मुझे लग रहा था मेरी सुहागरात हो, दिनेश दूल्हा और मैं दुल्हन। अब हम दोनों ऐसा कोई बंधन नहीं है जिससे हम दोनों करीब नहीं आएं। अब जब मन करता है हम दोनों एक-दूसरे को खुश कर देते हैं।

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