मनाली की ठंड में सहेली की चूत चुदाई की दास्तान1 min read

हाय, मेरा नाम कोमल है। ग्रेजुएशन का आखिरी साल था, मेरी सबसे हॉट सहेली शालिनी और उसका बॉयफ्रेंड करण मनाली ट्रिप पर जा रहे थे। मुझे भी जबरदस्ती घसीटा गया, वरना घरवालों को पता चल जाता।

ट्रिप से एक रात पहले हॉस्टल में हम दोनों अकेले थे। लाइट्स बंद, सिर्फ़ गुलाबी नाइट लैम्प जल रहा था। शालिनी मेरे बगल में लेटी थी, उसकी गर्म साँसें मेरे कान पर लग रही थीं। उसने धीरे से मेरी चूची पर उंगली फेरते हुए कहा, “कोमल यार, इस बार करण मुझे रंडी बना कर चोदेगा, बहुत दिन हो गए, मेरी चूत तो उसके लौड़े की प्यास से सूखी जा रही है।”

मैंने हँस कर उसकी गांड पर चपत मारी, “तेरे मजे तो पक्के, मैं तो बस तमाशा देखूँगी।” शालिनी ने मेरे होंठ पर उंगली रखी और फुसफुसाई, “तमाशा नहीं, करण का दोस्त रहेज भी आ रहा है, उसका लंड भी सात इंच से कम नहीं, तेरी चूत का भी बंदोबस्त हो जाएगा।”

फिर वो मेरे कान में बोली, “चल, पहले तुझे अपनी पिछली मनाली ट्रिप की चुदाई सुनाती हूँ, सुनकर तेरी पैंटी गीली हो जाएगी।”

मैंने तुरंत अपना टॉप और ब्रा उतार दी, सिर्फ़ काली पैंटी में लेट गई। शालिनी ने भी अपना नाइटी ऊपर चढ़ाया और पैंटी साइड करके अपनी चूत सहलाते हुए शुरू किया।

“जैसे ही हम मनाली पहुंचे, करण ने एक कोजी रूम लिया था, बाहर बर्फीली हवा, अंदर हीटर की गर्मी। शाम को घूम कर आए तो उसने मुझे लाल ट्रांसपेरेंट ब्रा-पैंटी दी और बोला, ‘जा रंडी, ये पहन के आ, आज तेरी चूत फाड़ दूँगा।’ मैं बाथरूम से निकली तो वो सिर्फ़ बॉक्सर में खड़ा था, उसका मोटा लौड़ा तंबू बनाए हुए था। मुझे देखते ही उसकी आँखें लाल हो गईं।”

शालिनी ने अपनी दो उँगलियाँ चूत में डाल कर चपचप शुरू कर दी। “फिर उसने मुझे दीवार से सटा दिया, गले लगाया और गहरी फ्रेंच किस शुरू कर दी। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस रही थी, गर्म साँसें आपस में टकरा रही थीं, मैं उसकी जीभ चूस रही थी जैसे वो उसका लंड हो। उसने मेरी गांड दोनों हाथों से मसलते हुए कहा, ‘तेरी गांड तो आज दबा-दबा कर लाल कर दूँगा।’ मैंने बॉक्सर के ऊपर से उसका लौड़ा पकड़ा, उफ्फ कितना सख्त और गर्म था, मेरी चूत से रस टपकने लगा।”

मेरी साँसें भी तेज़ हो गईं, मैंने अपनी चूची मसलते हुए पूछा, “फिर?”

“फिर वो मेरे पीछे आया, मेरी पीठ चूमने लगा, कंधे पर होंठ फेरते हुए कान चाटने लगा, दाँतों से हल्का काटा। मैं काँप गई। उसने पीछे से अपना लौड़ा मेरी गांड की दरार में रगड़ना शुरू किया, दोनों हाथ आगे बढ़ा कर मेरी 36 की चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगा, निप्पल्स को मरोड़ रहा था। मैं चिल्लाई, ‘आह्ह्ह… करण… और जोर से दबा ना… मेरी चूत में आग लग रही है।’”

शालिनी की आवाज़ में कामुकता बढ़ती जा रही थी। “फिर उसने मेरी ब्रा फाड़ कर फेंकी, मेरी चूचियाँ आज़ाद होते ही उछल गईं। वो उन पर टूट पड़ा, एक चूची मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाता, चूसता जैसे दूध निकाल रहा हो। मैं उसका सिर दबा रही थी, मेरे नाखून उसकी पीठ में गड़ गए। मैं हाँफ रही थी, ‘आअह्ह्ह… चूस ना… काट ले मेरे बूब्स को… ओह्ह्ह्ह…’”

मैंने अपनी पैंटी भी उतार दी थी, हम दोनों एक-दूसरे की चूत सहला रही थीं।

“फिर उसने मुझे बेड पर लिटाया, मेरे पैर चौड़े किए, जाँघों को चूमते हुए ऊपर आया। मेरी पैंटी एक झटके में उतार दी। मेरी गुलाबी चूत देख कर पागल हो गया। पहले दो उँगलियाँ अंदर डाल कर चोदने लगा, चपचप… चपचप… फिर अपना मुँह लगा दिया। मेरी चूत की खुशबू सूँघ कर बोला, ‘तेरी चूत की महक मुझे दीवाना बना देती है रंडी।’ फिर जीभ से चाटना शुरू किया, मेरी क्लिट को जीभ की नोक से टटोलता, चूसता। मैं तड़प उठी, ‘आह्ह्ह्ह… करण… खा जा मेरी चूत को… ऊईईई… ऊउउइइ… मेरी कमर खुद-ब-खुद उछल रही थी।’”

मैंने शालिनी की चूची मुँह में लेकर चूसते हुए पूछा, “फिर लंड चूसा तूने?”

शालिनी हाँफते हुए बोली, “हाँ रंडी… उसने मुझे घुटनों पर बिठाया, अपना मोटा सात इंची लौड़ा मेरे मुँह के सामने लाया। मैंने दोनों हाथों से पकड़ा, नसें फड़क रही थीं। पहले सहलाया, फिर मुँह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… वो मेरे बाल पकड़ कर पूरा लौड़ा गले तक ठूँकने लगा। मेरे गले में पहुँच रहा था, आँसू आ गए, पर मज़ा इतना था कि मैंने और तेज़ चूसा।”

“फिर मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई, चिल्लाई, ‘करण… अब डाल ना साले… मेरी चूत फट रही है तेरे लौड़े के बिना।’ वो हँसा, मुझे लिटाया, पहले लौड़े से मेरी चूत रगड़ी, क्लिट पर घुमाया। मैं तड़प रही थी, ‘आह्ह्ह… डाल ना कमीने… मार दे मुझे।’ फिर एक जोर का झटका… पूरा सात इंच अंदर चला गया। आआअह्ह्ह्ह… मार डाला रे… मेरी चूत फट गई… पर उफ्फ कितना मज़ा आया।”

शालिनी अब मेरी चूत में तीन उँगलियाँ डाल कर चोद रही थी। “फिर उसने स्पीड बढ़ा दी, हर धक्के में जड़ तक पेलता, चप… चप… चपचप… चपचप… मैं चीख रही थी, ‘और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत को… ह्हीईई… आअह्ह्ह…!’ वो मेरी टाँगें कंधे पर रख कर मिशनरी में पेल रहा था, मेरी चूचियाँ उछल रही थीं। फिर मुझे घोड़ी बनाया, कमर पकड़ कर पीछे से ऐसा ठोका कि मेरी चीखें निकल गईं, थप्प… थप्प… मेरी गांड पर लाल निशान पड़ गए। मैं बोली, ‘अंदर ही झड़ जा साले।’ और हम दोनों एक साथ झड़े। उसका गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया, इतना था कि बाहर तक बहने लगा।”

कहानी खत्म होते ही मैं शालिनी पर टूट पड़ी, बोली, “रंडी, तेरी कहानी से मेरी चूत जल गई, अब चाट मेरी।” शालिनी हँस कर बोली, “हाँ कोमल, आज तेरी चूत का रस पीऊँगी, तू मेरी चाट।”

हम 69 में लिपट गईं। मैं उसकी चूत चाट रही थी, वो मेरी। कमरे में सिर्फ़ चपचप… चपचप और हमारी सिसकारियाँ गूँज रही थीं, आह्ह्ह… कोमल… चाट… ऊईई… शालिनी… और तेज़… और हम दोनों एक साथ झड़ गईं।

अगले दिन ट्रिप पर चारों ने मिल कर खूब चुदाई की, वो फिर कभी सुनाऊँगी।

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