Makan malik beti sex story, landlord daughter sex story, first night fuck sex story, desperate girl sex story: मैं एक आम सा लड़का हूँ, वैसा ही जैसे ज्यादातर लड़के होते हैं। नॉर्मल बॉडी, रोज़ ऑफिस जाता हूँ और काम के चक्कर में काफी जगह घूमना पड़ता है। मेरी ताज़ा पोस्टिंग लुधियाना में हुई थी और यहाँ आने को अब पूरे दो साल हो चुके हैं। मैंने अपना कमरा अब तक नहीं बदला, क्योंकि जगह ठीक है, किराया कम और मकान मालिक की फैमिली भी बहुत सभ्य। मेरा कमरा पहली मंज़िल पर है, नीचे मकान मालिक का घर। मैं ज़्यादा किसी से घुलमिलता नहीं, सुबह ऑफिस निकलता हूँ और शाम को वापस आकर कमरे में बंद हो जाता हूँ। शामें अकेले गुज़ारता हूँ, कभी सैड सॉन्ग सुनता हूँ, कभी ग़ज़लें, या फिर कोई पंजाबी गाना जो मूड में फिट बैठे। हेडफोन लगाकर लेट जाता हूँ, बाहर की दुनिया से कटकर।
मकान मालिक के दो बच्चे हैं, एक लड़का और एक लड़की। लड़के का नाम रणवीर है, उम्र करीब २५ साल, एमबीए कर रहा है, स्मार्ट दिखता है लेकिन हमारी ज़्यादा बात नहीं होती। लड़की का नाम दिव्यांका है, वो २३-२४ साल की होगी, एमए कर रही है, कॉलेज जाती है। वो थोड़ी शर्मीली है, लेकिन कभी-कभी सीढ़ियों पर मिलते हैं तो मुस्कुरा देती है। हम लोग आपस में बहुत कम बात करते हैं, बस हैलो-हाय या कभी कोई छोटी-मोटी बात, जैसे मौसम कैसा है या कुछ सामान की ज़रूरत हो। मेरी उम्र २८ साल है और मैं यहाँ अकेला रहता हूँ, तो कभी-कभी मन में ख्याल आते हैं, लेकिन दिव्यांका के बारे में कभी गलत नहीं सोचा, बस नॉर्मल तरीके से। उसकी स्माइल अच्छी लगती है, लेकिन बस इतना ही।
उनकी फैमिली बहुत सीधी-सादी और अच्छे लोग हैं, कभी कोई परेशानी नहीं देते। मकान मालिक अंकल रिटायर्ड हैं, आंटी घर संभालती हैं। गर्मियों का मौसम था, लुधियाना की गर्मी चिपचिपी, पंखे की हवा भी कम लगती है। एक दिन ऑफिस में बॉस से थोड़ी झड़प हो गई, काम को लेकर टेंशन था, डेडलाइन मिस हो रही थी। शाम को घर लौटा तो सिर दर्द कर रहा था, मूड एकदम ऑफ। कमरे में आया, दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर धम्म से गिर पड़ा। सोचा थोड़ी देर लेटकर देखता हूँ, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। फिर उठा, फ्रिज से दो बीयर निकालीं, एक सांस में आधी पी गया। नशा चढ़ने लगा, मूड थोड़ा लाइट हुआ। कभी-कभी जब ऐसा मूड होता है, तो मैं कमरे में नंगा होकर रहता हूँ, कोई देखने वाला तो है नहीं। उस दिन भी कपड़े उतारे, सिर्फ नाइट बल्ब जलाया और लैपटॉप पर एक ब्लू फिल्म लगा ली। लंड सहलाते हुए देखने लगा, आँखें बंद करके कल्पना में खो गया।
खिड़की खुली हुई थी, ऊपर मकान मालिक का घर है, लेकिन ध्यान नहीं गया। फिल्म में वो सीन चल रहा था जहाँ लड़की जोर-जोर से कराह रही थी और मैं भी मस्त था। अचानक लगा जैसे कोई छाया पड़ी है। आँख खोली तो खिड़की पर साया दिखा। दिल जोर से धड़का, जल्दी से उठा, बाथरूम में घुसा, शॉर्ट्स पहनी, लैपटॉप बंद किया और खिड़की बंद करके बाहर निकला। बाहर दिव्यांका खड़ी थी, हाथ में किताबें लिए, जैसे अभी-अभी आई हो। उसकी आँखों में अजीब सी चमक थी, लेकिन मुस्कुरा रही थी। मैंने पूछा, कब आई? वो हंसकर बोली, बस अभी आई हूँ, क्या कर रहे थे? उसकी आवाज़ में शरारत लगी, लेकिन मैंने इग्नोर किया। मैंने कहा, कुछ नहीं, मूवी देख रहा था। वो बोली, कौन सी? मैंने झूठ बोल दिया, हॉलीवुड की डे एंड नाइट। पूछा, तुमने देखी है? वो बोली, नहीं। मैंने कहा, देखोगी? वो तुरंत हाँ बोल दी।
मन में शक हुआ, कहीं इसने मुझे नंगा देखते हुए तो नहीं देख लिया? लेकिन सोचा, नहीं, इतनी जल्दी क्या। हम दोनों कमरे में आए, मैंने लैपटॉप पर वो नॉर्मल फिल्म शुरू की। वो बैठ गई, लेकिन दो मिनट बाद बोली, ये नहीं, मुझे वो वाली देखनी है जो तुम देख रहे थे। मैं चौंक गया, कहा, ये वही है। वो मुस्कुराई और बोली, मुझे पता है तुम क्या देख रहे थे, मैंने तुम्हें नंगा और वो फिल्म देखते हुए देख लिया है। मुझे वही दिखाओ। उसकी आँखों में चाहत थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी। मैंने मना किया, बोला ये तुम्हारे देखने लायक नहीं है। वो जिद करने लगी, बोली, मेरी एक फ्रेंड ने बताया था ऐसी फिल्मों के बारे में, लेकिन मैंने कभी नहीं देखी। प्लीज़, सिर्फ थोड़ी देर। उसकी जिद देखकर मैं पिघल गया, लेकिन कहा, नीचे जाओ, आंटी सोचेंगी इतनी देर से ऊपर क्या कर रही हो। कोई आ गया तो प्रॉब्लम। वो बोली, बस दस मिनट। मैंने हाँ कर दी, फिल्म शुरू की और बाहर चला गया, दिल धड़क रहा था।
थोड़ी देर बाद अंदर गया, बोला बस करो, कोई आ जाएगा। वो फिल्म बंद करके उठी, बोली ठीक है, लेकिन बाद में ज़रूर दिखाओगे ना? मैंने हाँ में सिर हिलाया। अचानक वो मेरे करीब आई, गाल पर किस किया और चली गई। वो किस इतना अचानक था कि मैं स्तब्ध रह गया, दिल की धड़कन तेज़ हो गई, जैसे रेलगाड़ी दौड़ रही हो। हाथ-पैर ठंडे पड़ गए, लेकिन अच्छा लगा। फिर खुद को संभाला, खाना खाया और सो गया। अगले दिन सब नॉर्मल, लेकिन वो किस याद आती रही। दिन गुज़रते गए, मैं उस बात को भूलने की कोशिश करता रहा, लेकिन रात में वो सीन याद आ जाता।
एक शाम ऑफिस से देर से लौटा, रात के नौ बज चुके थे। ऊपर छत पर दिव्यांका खड़ी थी, हवा में बाल उड़ रहे थे, वो सफेद टॉप और नीली शॉर्ट्स में थी, एकदम स्वीट और सेक्सी लग रही थी। मैंने मजाक में कहा, क्या बात है, आज किसको मार डालने का इरादा है? वो हंसकर बोली, तुम्हें। मैं भी हंस दिया, लेकिन अंदर कुछ हलचल हुई। वो बोली, इतनी देर क्यों हो गई, मैं कब से वेट कर रही हूँ। मैंने कहा, ऑफिस में काम था, कॉल कर देती। वो बोली, कुछ नहीं, रोज़ जल्दी आ जाते हो ना, आज तो नौ बज गए। मैं चुप रहा, कमरा खोला और अंदर आ गया। वो पीछे-पीछे आ गई, जैसे कुछ कहना चाहती हो।
वो बोली, याद है, तुम्हें मुझे एक मूवी दिखानी है। मैंने कहा, ठीक है, कल चलते हैं सिनेमा। वो मुस्कुराई, बोली वो नहीं, जो तुम उस दिन देख रहे थे, वो वाली। मैंने कहा, वो वाली? वो हाँ बोली। मैंने मजाक में कहा, तुम मुझे पिटवाना चाहती हो क्या? वो हंस पड़ी। फिर मैंने लैपटॉप दिया, बोला ले जाओ, फिल्म इसी में है। वो गुस्से से देखने लगी, बोली कुछ नहीं और लेकर चली गई। मैं सोच में पड़ गया, इसे क्या हुआ? कपड़े बदले, बीयर निकाली और पीने लगा। अभी आधी बीयर पी ही थी कि दरवाज़े पर नॉक हुई। मैंने बीयर छुपाई, खोला तो दिव्यांका थी, हाथ में खाने की प्लेट। बोली, लो खाना खा लो, आज तुम्हारा टिफिन नहीं आया। मैं उसे देखता रहा, वो थोड़ी गुस्से में लग रही थी। बोली, ले लो, क्या देख रहे हो? मैंने प्लेट ली, वो चली गई।
खाना खाया, बीयर खत्म की, समय देखा तो ११:३० हो चुके थे। छत पर घूमने गया, हवा अच्छी लग रही थी। तभी दिव्यांका लैपटॉप लेकर आई, बोली इसकी बैटरी खत्म हो गई। मैंने कहा, चार्जर अंदर बैग में है, ले लो। वो शॉर्ट और टी-शर्ट में थी, रात की रोशनी में एकदम हॉट लग रही थी, बॉडी के कर्व्स साफ दिख रहे थे। मेरा लंड हल्का सा टाइट होने लगा। वो अंदर गई और कमरे में ही फिल्म देखने लगी। मैं अंदर आया, बोला दिव्यांका, इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो, कोई देख लेगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी। वो उठी, मेरे करीब आई, मुझे हग किया और बोली, आज घर पर कोई नहीं है, पापा टूर पर गए हैं, भाई फ्रेंड के घर पढ़ाई के लिए, माँ सो गई हैं। फिर वो मुझे किस करने लगी, होंठों पर होंठ रख दिए। मैं भी जवाब में किस करने लगा, उसका बदन गर्म था, हाथ उसके पीठ पर फिसल गए।
किस करते-करते मेरा हाथ उसके स्तनों पर चला गया, मैं दबाने लगा, वो मुलायम थे, निप्पल्स हार्ड हो चुके थे। वो कराहने लगी, आह्ह.. ओह्ह.. मैंने पूछा, पैंटी क्यों नहीं पहनी? वो शर्मा कर बोली, ब्रा भी नहीं पहनी, तुम्हारे लिए। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की, उतार दी, स्तन नंगे हो गए, गुलाबी निप्पल्स देखकर मुंह में पानी आ गया। मैं चूसने लगा, कभी एक को दबाता, कभी काटता, वो बोली, आह्ह.. धीरे.. मजा आ रहा है। वो मेरे कपड़े निकालने लगी, मेरी शर्ट उतारी, पैंट खोली, लंड बाहर आ गया, वो देखकर बोली, कितना बड़ा है ये.. चाटूँ क्या? मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, वो बाहें फैलाकर बोली, आ जाओ ना.. मुझे बहुत बेचैनी हो रही है। मैं पूरे शरीर पर किस करने लगा, गले से शुरू किया, फिर स्तन, नाभि तक। नीचे पहुंचा तो उसकी शॉर्ट उतारी, चूत क्लीन शेव, गीली हो चुकी थी। मैंने पूछा, कब क्लीन की? बोली, आज ही, तुम्हारे लिए, चाटो ना इसे.. मैं जीभ से चाटने लगा, आह्ह.. इह्ह्ह.. ओह्ह.. वो कमर उचकाने लगी, बोली, उंगली डालो ना.. मैंने एक उंगली अंदर की, फिर दो, फिंगरिंग करते हुए चाटता रहा, वो चिल्लाई, आह्ह.. ह्ह्ह.. ऊउइ.. बस.. अब सहन नहीं होता.. चोदो ना मुझे।
फिर मैंने कहा, लंड मुंह में लो। वो बोली, नहीं.. डर लगता है। मैंने प्लीज़ कहा, वो थोड़ा सा मुंह में लिया, फिर निकाला। मैंने फिल्म दिखाई, बोला ऐसे करो। वो मुंह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. लेकिन ठीक से नहीं, मैं गले तक डालता, वो खांसती, लेकिन मजा आ रहा था। अब कंट्रोल नहीं हो रहा था, वो कांप रही थी, बोली, डालो ना अंदर, मैं बेचैन हूँ.. चूत में आग लग रही है। मैंने लंड पर थूक लगाया, अंदर डालने लगा, वो डरी, बोली धीरे.. पहले बार है। मैंने होंठ बंद किए, एक झटका दिया, थोड़ा अंदर गया, वो चीखी, आह्ह.. निकालो.. दर्द हो रहा है। मैं रुका, गाल सहलाया, लेकिन वो छटपटाई, तभी मेरा निकल गया। वो रोने लगी, आँसू बहने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा, बोला सॉरी, पहली बार दर्द होता है। मैंने हग किया, बच्चे की तरह सहलाया, वो शांत हुई।
फिर बोली, अब धीरे करो.. मुझे पूरा चाहिए। मैंने क्रीम लगाई, पोज़िशन बदली, बिस्तर पर बैठा, उसे गोद में बिठाया। किस करते हुए झटका मारा, आधा अंदर, फिर लिटाया और पूरा डाला। वो रोई, आह्ह.. ह्ह्ह.. लेकिन मैंने जकड़ लिया। दो मिनट बाद शांत हुई, मैं धीरे-धीरे चोदने लगा, वो बोली, आह्ह.. मजा आ रहा है.. जोर से.. और तेज़.. मैं स्पीड बढ़ाई, १५ मिनट बाद दोनों झड़ गए। फिर रात भर कई राउंड किए, कभी डॉगी स्टाइल में, वो बोली, पीछे से डालो.. कितना अच्छा लग रहा है.. कभी मिशनरी में, वो बोली, आँखों में देखकर चोदो.. मैं तुम्हारी हूँ आज। ३ बजे वो चली गई, जाते हुए बोली, कल फिर मिलेंगे।
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