भोपाल में मामी को फेसबुक से पटाया – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Mature mami incest sex story, aunty nephew sex story, Rakhail sex story: मैं डॉक्टर विनीत हूं, भोपाल में रहता हूं और यहीं प्रैक्टिस करता हूं। छह फीट का कद, अच्छी पर्सनैलिटी, लोग कहते हैं हैंडसम हूं। लेकिन ये कहानी उस वक्त की है जब मैं सिर्फ उन्नीस साल का था, कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। मम्मी-पापा ने मुझे हायर स्टडीज के लिए भोपाल मामा जी के पास भेज दिया था, ताकि घर जैसा माहौल मिले और पढ़ाई पर फोकस रहे।

मामा जी और मामी जी दोनों स्कूल टीचर थे। उनके दो छोटे बेटे थे, शायद आठ और दस साल के, जो रोज स्कूल जाते थे। घर बड़ा था, आरामदायक। मैंने भोपाल पहुंचते ही एक अच्छी कोचिंग में एडमिशन ले लिया। रोज सुबह उठकर पढ़ाई, शाम को कोचिंग, रात को घर पर रिवीजन। सब कुछ नॉर्मल चल रहा था, लेकिन तभी मामा जी का ट्रांसफर हो गया। वो दूसरे शहर चले गए, और घर में अब सिर्फ मामी जी, उनके दोनों बच्चे और मैं रह गए।

मामी का नाम अनुपमा था। उम्र करीब चालीस साल, लेकिन देखने में ऐसी लगतीं जैसे अभी भी जवानी की दहलीज पर हों। गोरी चिट्टी त्वचा, काले घने बाल, और वो फिगर – 38-36-38 का, कद पांच फीट पांच इंच। स्कूल जातीं तो साड़ी में, घर पर मैक्सी में। पड़ोसी भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे। वो सच में एक मस्त माल थीं, ऐसी कि कोई भी देखकर मदहोश हो जाए। मैं तो बस उनके साथ रहते हुए रोज उन्हें चोरी-छिपे देखता रहता था।

एक दोपहर की बात है। मैं कोचिंग से लौटा तो देखा मामी जी आंगन में कपड़े धो रही थीं। नीली मैक्सी पहने हुए, जो गीली होकर उनके बदन से चिपक रही थी। जैसे ही वो झुकीं, उनके बड़े-बड़े स्तन मैक्सी के गले से बाहर झांकने लगे, पहाड़ों की तरह लटकते हुए। मैं वहीं खड़ा रह गया, आंखें फाड़कर देखता रहा। दिल की धड़कन तेज हो गई, और नीचे लंड में हलचल होने लगी। वो इतनी सेक्सी लग रही थीं कि मन में ख्याल आया – काश ये मेरी होतीं। उसी दिन से मैंने ठान लिया कि किसी भी तरह मामी को पटाऊंगा, अपना बनाऊंगा। लेकिन कैसे? वो मेरी मामी थीं, शादीशुदा, दो बच्चों की मां। फिर भी, मामा जी की गैरमौजूदगी में उनका अकेलापन मुझे मौका लग रहा था।

दिन बीतते गए। मैं मामी से बातें बढ़ाने लगा। कभी किचन में मदद, कभी बच्चों की पढ़ाई में। मामी भी मुझे बेटा कहकर पुकारतीं, लेकिन मैं उनके करीब आने की कोशिश करता रहता। एक शाम मामी मेरे कमरे में आईं, हाथ में अपना नया फोन लिए। बोलीं, “बेटा, ये फेसबुक क्या चीज है? सब इसके बारे में बात करते हैं।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “मामी, ये एक ऐसी जगह है जहां लोग अपने दोस्तों से जुड़ते हैं, फोटो शेयर करते हैं, चैट करते हैं। मैं आपकी आईडी बना देता हूं।” मैंने तुरंत उनकी एक प्रोफाइल बना दी, कुछ बेसिक डिटेल्स डालीं। मामी खुश हो गईं, बोलीं, “अच्छा, अब मैं भी मॉडर्न हो गई।” लेकिन मेरे दिमाग में प्लान चल रहा था। अगले दिन मैंने एक फेक आईडी बनाई – एक पुराने स्टूडेंट की तरह। और मामी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।

शाम को मामी फिर मेरे पास आईं, फोन दिखाते हुए बोलीं, “देखो बेटा, ये क्या आया है? कोई रिक्वेस्ट।” मैंने देखा और कहा, “मामी, शायद कोई पुराना स्टूडेंट होगा। एक्सेप्ट कर लो, बात करके देखो। अगर अच्छा न लगे तो ब्लॉक कर देना।” मामी ने हिचकिचाते हुए एक्सेप्ट कर लिया। अब खेल शुरू हो गया। मैंने उसी आईडी से मैसेज किया – “हैलो मैडम, मैं आपका पुराना स्टूडेंट हूं। याद है?”

मामी ने रिप्लाई किया, थोड़ा कंफ्यूज्ड। लेकिन धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। मैं दिन-रात मैसेज करता। मामी भी रिस्पॉन्स देतीं। मामा जी दूर थे, तो उनका अकेलापन झलकता था। वो घर की बातें शेयर करतीं, मामा की शिकायतें, बच्चों की शरारतें। मैं सुनता, सलाह देता, उन्हें स्पेशल फील करवाता। कई रातें हम तीन बजे तक चैट करते रहते। मामी कहतीं, “तुमसे बात करके अच्छा लगता है। घर में कोई नहीं जो समझे।” मैं सोचता, कितना आसान हो रहा है।

सुबह उठते ही गुड मॉर्निंग, शाम को गुड नाइट। बीच में फोटो मांगता – “मैडम, आपकी एक पिक भेजो ना।” पहले तो मामी शरमातीं, लेकिन फिर भेजने लगीं। कभी साड़ी में, कभी मैक्सी में। मैं तारीफ करता, “वाह मैडम, आप तो अब भी इतनी खूबसूरत हो।” मामी खुश होतीं। घर में मैं देखता कि अब वो ज्यादा समय फोन पर बितातीं, बच्चों को कम डांटतीं, जैसे कोई नई जिंदगी मिल गई हो।

एक रात चैट में मैंने हिम्मत करके लिखा – “मैडम, आई लव यू।” मामी ने थोड़ी देर चुप्पी साधी, फिर रिप्लाई आया – “ये क्या बोल रहे हो? मैं शादीशुदा हूं।” लेकिन मैंने इमोशनल कार्ड खेला, “मैडम, आपसे बात करके मुझे प्यार हो गया। आपका अकेलापन देखकर दुख होता है।” मामी हिचकिचाईं, लेकिन आखिर हां कह दिया। अब मैं उन्हें गर्लफ्रेंड कहता। ज्यादा बोल्ड फोटो मांगता, जैसे ब्लाउज में या मैक्सी के साथ स्माइल। मामी भेजतीं, और कहतीं, “तुम्हें ही दिखा रही हूं, किसी और को मत बताना।”

हमारा रिश्ता अब बहुत क्लोज हो गया था। मामी मिलने की बात करतीं, “कभी मिलोगे?” मैं कहता, “हां, जल्दी।” लेकिन असल में मैं ही उनके साथ था। अब समय आ गया था सच बताने का। एक शाम, बच्चे दोस्तों के घर खेलने चले गए। मामी किचन में खाना बना रही थीं, लाल मैक्सी पहने हुए, बाल खुले। मैं पीछे से गया, कमर से पकड़ा और गले लगा लिया। मामी चौंक गईं, “अरे बेटा, ये क्या कर रहे हो? छोड़ो।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “मामी, मैं ही वो हूं। आपका पुराना स्टूडेंट।” मामी के चेहरे का रंग उड़ गया। वो पीछे हटीं, “क्या बकवास है ये? मैं कुछ नहीं समझी।” मैंने फोन निकाला, सारी चैट दिखाई, फोटो दिखाई। मामी समझ गईं। आंखों में आंसू आ गए, वो रोने लगीं, मेरे पैरों में गिर गईं, “बेटा, माफ कर दो। मैंने गलती की। किसी को मत बताना, मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।”

मैंने उन्हें उठाया, कमरे में ले गया। बेड पर बिठाया, पानी पिलाया। धीरे-धीरे चुप कराया। बोला, “मामी, मैं आपका नुकसान नहीं करूंगा। मैं तो आपसे प्यार करता हूं।” मामी रोते हुए बोलीं, “तुम उन्नीस साल के हो, मैं चालीस की। ये गलत है।” मैंने उनका हाथ पकड़ा, अपने लंड पर रखा, “देखो मामी, तुम्हारे लिए ये कितना तन जाता है। मैं क्या करूं?” मामी का हाथ कांप रहा था, लेकिन वो हटी नहीं।

फिर मैंने उन्हें गले लगा लिया। होंठों पर किस किया। मामी पहले विरोध करती रहीं, लेकिन धीरे-धीरे साथ देने लगीं। मैंने मैक्सी के बटन खोले, उनके बड़े स्तनों को बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से दबाया। मामी सिहर उठीं, “आह्ह… बेटा… ये मत करो… ओह्ह…” मैंने ब्रा उतारी, निप्पल्स चूसे। मामी की सांसें तेज हो गईं, “उंह्ह… विनीत… धीरे… आह्ह…” मैंने मैक्सी नीचे सरका दी, पैंटी उतारी। उनकी चूत गीली हो चुकी थी। उंगली से सहलाया, “मामी, कितनी गर्म हो तुम।”

मामी अब विरोध नहीं कर रही थीं, बोलीं, “बेटा, अब रुक मत। मुझे भी जरूरत है।” मैंने कपड़े उतारे, अपना लंड बाहर निकाला। मामी ने देखा तो आंखें फैल गईं, “इतना बड़ा… आह्ह…” मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, चूत पर लंड रगड़ा। धीरे से अंदर धकेला। मामी चिल्लाईं, “आह्ह्ह… इह्ह्ह… धीरे बेटा… ओह्ह्ह… मार डाला…” मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा, “मामी, कितनी टाइट हो… उंह्ह… ले लो मेरा… आह्ह…”

मामी नीचे से कमर उछाल रही थीं, “हां बेटा… चोदो अपनी मामी को… आह्ह… और जोर से… ऊईई… ऊंह्ह…” कमरा उनकी सिसकारियों से गूंज रहा था। मैंने पोजीशन चेंज की, उन्हें घोड़ी बनाया। पीछे से डाला, “मामी, तेरी गांड कितनी मस्त है… ले… आह्ह…” मामी चीखीं, “बेटा… हां… फाड़ दो… ओह्ह… हो गया… आह्ह्ह्ह…” मैंने भी झड़ दिया, सारा रस अंदर छोड़ दिया।

हम दोनों हांफते हुए लेट गए। मामी मेरे सीने पर सर रखकर बोलीं, “बेटा, ये गलत था लेकिन अच्छा लगा।” मैंने कहा, “मामी, मैं तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूं। भगवान के सामने शादी कर लो।” मामी डरीं, “अगर पता चला तो?” मैंने वादा किया, “ये हमारा राज रहेगा।” उसी रात हमने घर के मंदिर में सिंदूर भरा, शादी की। अब अनुपमा मेरी थीं।

अगले दिन से जिंदगी बदल गई। बच्चे स्कूल जाते, मैं मामी को चूमता, चोदता। वो कहतीं, “बेटा, अब मैं तेरी रखैल हूं। ले, चूस ले मेरे चुचे।” शाम को मिलते, किचन में पीछे से पकड़ता, “अनुपमा, तेरी चूत कितनी रसीली है।” वो हंसतीं, “चोद ना बेटा, अपनी मामी को।” मैंने उन्हें घर में सिर्फ मैक्सी पहनने को कहा, बिना अंदर कुछ के। पहले डरीं, लेकिन मान गईं। स्कूल में भी बिना ब्रा। जहां मौका, स्तन दबाता। दो साल ऐसे चले। फिर मैं दूसरे शहर चला गया, लेकिन आज भी मिलते हैं, चुदाई करते हैं, खुश हैं।

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