Father licking ass sex story – Ass licking sex story: पैंटी को फिर वहीँ सोफे के नीचे डालकर कर्नल राजेश स्वीटी के कमरे की ओर बढ़े। दरवाज़ा हल्के से धकेला तो अंदर का नज़ारा देखकर उनके पैर जम गए।
कहानी का पिछला भाग: बाप की नजर बेटी की जवान चूत पर – 1
स्वीटी गहरी नींद में थी। स्कर्ट पेट तक खिसकी हुई थी, सफेद चिकनी जाँघें पूरी नंगी, बीच में उसकी चिकनी चूत हीरे की तरह चमक रही थी। टॉप भी ऊपर सरका था, एक गोरा चूचा पूरी तरह बाहर लटक रहा था, गुलाबी निप्पल तना हुआ।
राजेश का लंड पल भर में लोअर फाड़कर बाहर आने को हुआ। वो दो कदम और आगे बढ़े, आँखें फटी की फटी रह गईं। बुत बनकर खड़े रहे, अपनी जवान बेटी के अधनंगे जिस्म को पीते रहे। जब लंड ने जोर से धक्का मारा तब होश आया। फौरन यू-टर्न लिया और बाहर दीवार से सटकर खड़े हो गए।
मन और लंड में जंग चल रही थी। विवेक चीख रहा था कि गलत है, पर लंड कह रहा था बस एक बार और देख लूँ। आखिरकार लंड जीत गया। राजेश फिर कमरे में घुसे, बेड के किनारे बैठ गए।
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“स्वीटी… बेटा…” बहुत धीमी आवाज़ में पुकारा, तीन बार पुकारा। कोई हलचल नहीं। चौथी बार पुकारते हुए हाथ सिर पर फेरा। फिर भी कोई हरकत नहीं। हिम्मत बढ़ी।
बहाना बनाते हुए स्कर्ट ठीक करने के नाम पर हथेली पेट पर रखी, धीरे-धीरे नीचे सरकाई। गर्म मखमली त्वचा को छूते ही करंट दौड़ गया। हाथ ऊपर बढ़ा, टॉप के नीचे घुसा और पहला चूचा पूरा मुट्ठी में भर लिया।
“आह्ह… स्वीटी…” राजेश की साँसें तेज हो गईं। अंगूठे से निप्पल सहलाया, दूसरा हाथ बढ़ाकर टॉप ऊपर उठाया, दूसरा चूचा भी आज़ाद कर दिया। अब दोनों हाथों में एक-एक भरा हुआ चूचा था।
राजेश ने आँखें बंद कीं, डॉली की याद आ गई। झुककर दोनों चूचों के बीच नाक घुसेड़ दी। गहरी साँस ली, बेटी के जिस्म की खुशबू फेफड़ों में भर गई। निप्पल होंठों में लिया, चूसा, “चुप्प… चुप्प… आह्ह डॉली…”
फिर दाँतों से हल्का काटा, जीभ से चाटा। थूक से निप्पल भीग गए, ए.सी. की हवा लगते ही सिकुड़कर और कड़े हो गए। राजेश पागल हो रहा था, सालों की भूख एक साथ बाहर आ रही थी।
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तभी स्वीटी की नींद टूटी। उसने ऊपर झुके पापा को देखा, डर से अकड़ गई। फिर समझ आई कि ये उसके अपने पापा हैं। वो लाश की तरह पड़ी रही, साँसें रोककर।
राजेश को लगा शायद करवट ली होगी। माथे का पसीना पोंछा और स्वीटी के बगल में लेट गया। कोहनी ऊपर सरका दी ताकि चूचे तक रास्ता साफ हो जाए और स्वीटी का मुँह भी ढक जाए।
अब वो स्वीटी के भाव नहीं देख सकता था। स्वीटी सब समझ रही थी, उसका बदन रोमांच से काँप रहा था। निप्पल पत्थर जैसे कड़े हो गए। राजेश ने बायाँ निप्पल होंठों में लेकर जोर से चूसा, “च्ल्लप… च्ल्लप… आह्ह्ह…”
स्वीटी ने होंठ काट लिए, आँखें बंद कर ली। उसकी चूत में बाढ़ आ गई।
राजेश का हाथ नीचे सरका, जाँघ पर रखा, फिर चूतड़ तक ले गया। स्कर्ट ऊपर उठाई, पूरी हथेली से गोल-गोल मादा चूतड़ दबाए। उंगली गांड की दरार में फेरने लगा।
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स्वीटी पागल हो रही थी, “ओह्ह… पापा…” मन ही मन सिसक रही थी।
राजेश अचानक उठे, लोअर उतार फेंका और स्वीटी के पीछे घुटनों के बल बैठ गए। अब उसका मोटा लंड हवा में लहरा रहा था, बेटी की गांड से महज आधा फुट दूर।
दोनों चूतड़ों पर हाथ फेरा, झुककर चूमने लगा। कभी दाएँ, कभी बाएँ। दाँतों से हल्का काटा। फिर दोनों हाथों से चूतड़ फैलाए और मुँह दरार में घुसेड़ दिया।
“आह्ह्ह… डॉली मेरी जान…” गहरी साँस ली, खुशबू सूंघी और जीभ गांड के छेद पर टिका दी। जीभ से चाटने लगा, ऊपर से नीचे तक पूरी दरार चाटता रहा।
स्वीटी की हालत खराब थी, चूत से रस टपक रहा था। वो किसी तरह खुद को रोक रही थी।
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राजेश पूरी तरह डॉली के नशे में था, जीभ तेजी से चल रही थी, “च्ट्ट… च्ट्ट… च्ल्प… आह्ह्ह मेरी जान… तेरी बेटी में तेरी सारी खुशबू है…”
स्वीटी अब बर्दाश्त नहीं कर पाई। उसने खांसी की एक्टिंग शुरू की, “खँख… खँख…”
राजेश के होश उड़ गए। लोअर उठाया और नंगा ही भागता हुआ कमरे से बाहर निकल गया।
दरवाज़ा बंद होते ही स्वीटी ने आँखें खोलीं। उसे अब समझ आया कि पापा पूरे नंगे थे। उसका बदन फिर आग हुआ। दो उंगलियाँ चूत में ठूँसकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगी, “आह्ह्ह पापा… ओह्ह्ह… तुमने मेरी गांड चाटी… आह्ह्ह…”
तीस सेकंड में झड़कर बेदम हो गई। ठंडी होने पर ख्याल आया कि पापा मम्मी का नाम ले रहे थे। उसे पापा पर तरस आने लगा। मम्मी जैसी दिखती हूँ इसलिए पापा मेरे करीब आते हैं। अब उसके मन में पापा के लिए कोई गुस्सा नहीं था, सिर्फ दया और हल्का सा रोमांच था।
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उधर राजेश अपने कमरे में लौटे, लंड को जोर-जोर से हिलाकर माल निकाला और खुद को कोसते हुए सो गए।
प्यारे पाठकों, अब बेटी भी पापा के लिए पिघलने लगी है। अगले भाग में देखिए कब टूटती है दोनों की शर्म की आखिरी दीवार।
कहानी का अगला भाग: बाप की नजर बेटी की जवान चूत पर – 3