देवर को रस्सी से बांधकर, भाभी ने देवर का लंड निचोड़ा1 min read

Bhabhi devar bondage sex story – Rassi se bandhkar sex story: मैं सूरज हूँ, पर वो बात अगस्त 2020 की है जब मैं सिर्फ 23 का जवान, फिट और तगड़ा लड़का था। जयपुर के उस पुराने मकान में हम तीन लोग रहते थे – बड़े भैया, उनकी खूबसूरत पत्नी रचना भाभी और मैं। भैया सरकारी नौकरी में थे, महीने के बीस-पच्चीस दिन टूर पर ही रहते थे। रचना भाभी उस वक्त 30 साल की थीं, गोरा दूधिया रंग, भरे-भरे भारी चूचे, पतली कमर और इतनी कि हाथ में आ जाए और ऐसी गोल-मटोल, मुलायम गांड कि जब वो साड़ी में झुकतीं तो लंड अपने आप खड़ा हो जाता। उनकी आँखों में हमेशा एक शरारती चमक रहती थी, होंठों पर हल्की सी मुस्कान और बात करते वक्त जो हल्की हंसी निकलती थी, उसमें भी सेक्स की खुशबू घुली रहती थी। मैं जानता था कि वो भी मुझे चुपके-चुपके घूरती हैं, पर भैया के सामने दोनों बस नजरें मिलाकर रह जाते थे।

उस रात भैया अपने ऑफिस के लम्बे टूर पर गए थे, घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। रात के ठीक दस बज रहे थे, बाहर बारिश की बूंदें खिड़की से टपक रही थीं, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी। मैं अपने कमरे में लेटकर मोबाइल पर गेम खेल रहा था, तभी दरवाजा धीरे से खुला और भाभी अंदर आ गईं। काली पतली सी नाइटी पहनी थी जो उनके गोरे जिस्म से चिपककर हर उभार को साफ-साफ दिखा रही थी, निप्पल्स सख्त होकर कपड़े पर उभरे हुए थे। उनकी आँखों में आज कुछ और ही आग जल रही थी। वो धीरे-धीरे मेरे पास आईं, बेड पर बैठीं और अपनी गर्म हथेली मेरी जांघ पर रखकर फुसफुसाई, “सूरज, आज रात तू मेरा मेहमान है।”

उनकी हथेली की गर्मी मेरे जिस्म में बिजली की तरह दौड़ गई। मैंने हँसते हुए कहा, “भाभी, मैं तो रोज का मेहमान हूँ, आज क्या खास है?” वो मेरे कान के बिल्कुल पास आईं, गर्म साँसें मेरे कान को छू रही थीं, “आज रात तू मेरा बंधक बनेगा और मैं तेरे साथ वो सब करूँगी जो मैंने अपने गंदे-गंदे सपनों में देखा है।” मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया। मैंने मजाक में कहा, “भाभी, बंधक बनाना ठीक है, लेकिन छोड़ोगी भी ना?” भाभी ने शैतानी हँसी हँसी और बेड के नीचे से मोटी मुलायम रस्सी निकाल ली, “छोड़ूँगी, पर तब जब मेरी चूत तेरा पूरा लंड चखकर निचोड़ लेगी।”

उनकी बात सुनते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए। भाभी ने तेजी से मेरे दोनों हाथ पलंग के लोहे के हेडबोर्ड से कसकर बाँध दिए। रस्सी थोड़ी खुरदरी थी, कलाई में हल्की चुभन हो रही थी, पर वो दर्द भी मजा दे रहा था। मैं थोड़ा घबराया, पर उनकी कामुक नजरें और होंठों पर मुस्कान देखकर लंड और सख्त हो गया। “भाभी, ये क्या कर रही हो?” मैंने काँपती आवाज में पूछा। भाभी ने मेरी बनियान ऊपर उठाकर फाड़ दी, मेरी चौड़ी छाती पर नाखून फिराए, फिर झुककर होंठों पर अपने गर्म-गर्म, नरम होंठ रख दिए। उनका चुम्बन इतना गहरा, इतना जुनूनी था कि मेरी साँसें रुक गईं, जीभ मेरी जीभ से लिपटकर लार का मीठा स्वाद ले रही थी, उनकी लार मेरे मुँह में बह रही थी।

चुम्बन तोड़ते ही भाभी ने मेरी शॉर्ट्स एक झटके में नीचे खींच दी। मेरा 7 इंच का मोटा, नसों वाला लंड बाहर आया तो भाभी की आँखें चमक उठीं, “अरे वाह सूरज, तेरा लंड तो किसी घोड़े सा मोटा और तगड़ा है!” फिर बिना एक पल गँवाए झुक गईं और टोपे को जीभ से चाटने लगीं। ग्ग्ग्ग… गी… गों… गों… गोग… पूरा लंड मुँह में लेकर गले तक उतार लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… उनका गला उनकी आवाज से भर गया, लार की लड़ी लंड पर लटक रही थी, वो कभी टोपे को चूसतीं, कभी अंडकोषों को मुँह में लेकर चूसतीं, कभी जीभ से नसों पर नाचती थीं। मैं हाथ बंधे होने की वजह से सिर्फ सिसकारियाँ ले पा रहा था, “आह्ह्ह भाभी… तुम्हारा मुँह तो स्वर्ग है… और गहरा… ग्ग्ग्ग… और तेज चूसो!”

“भाभी मेरे हाथ खोल दो… तुम्हारी चूचियाँ दबाना और चूसना चाहता हूँ,” मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा। भाभी ने शरारत से हँसकर हाथ खोल दिए, “अब तू गुलाम नहीं रहा, पर मेरी चूत का दीवाना जरूर बन चुका है।” मैंने फौरन उनकी नाइटी ऊपर उठाई, ब्रा नहीं थी, सीधे भारी-भारी गोरे चूचे बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल्स इतने सख्त थे कि चूसते ही भाभी की चीख निकल गई, “आह्ह्ह्ह सूरज… मेरी चूचियाँ जोर से चूस… ह्ह्हा… आअह्ह्ह… और जोर से काट!” मैं एक चूचे को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रहा था, दूसरे को हाथ से मसल रहा था, दूध जैसा नरम और गर्म था, भाभी का बदन काँप रहा था, उनकी साँसें तेज और गर्म मेरे चेहरे पर लग रही थीं।

फिर भाभी ने मेरे सिर को नीचे दबाया, “सूरज मेरी चूत चाट, आज तक किसी ने नहीं चाटी ऐसे।” पैंटी उतारी तो बिल्कुल चिकनी, गुलाबी चूत रस से लबालब भरी थी, खुशबू इतनी मदहोश करने वाली कि मैं पागल हो गया। जीभ दाने पर रखते ही भाभी ने मेरे बाल पकड़कर मुँह चूत में दबा दिया, “आह इह्ह… ओह्ह्ह सूरज… गहरा चाट… ऊउइईई… ह्ह्हा आह्ह्ह्ह… सारा रस पी जा!” उनका रस मेरे मुँह में बह रहा था, मीठा-नमकीन स्वाद, मैं जीभ अंदर-बाहर कर रहा था, वो काँपकर झड़ने वाली थीं।

फिर भाभी ने मुझे लिटाया और हाथ फिर से कसकर बाँध दिए। “सूरज अब तू मेरी चूत का गुलाम है।” मेरे ऊपर चढ़ीं, लंड को चूत पर रगड़ा और एक जोरदार झटके में पूरा अंदर ले लिया, “आआह्ह्ह्ह सूरज… तेरा मोटा लंड मेरी चूत फाड़ रहा है… ओह्ह्ह्ह्ह!” मिशनरी में उछलने लगीं, चूचियाँ मेरे मुँह पर मार रही थीं, मैं जितना हो सके निप्पल चूस रहा था, “आह ह ह ह ह्हीईई… जोर से चोद… मेरी चूत अभी फाड़ डाल!”

फिर हाथ खोलकर डॉगी स्टाइल में घुटनों के बल करवाया, गोल-मटोल गांड ऊपर की, मैंने लंड चूत के रस से गीला कर गांड में सरकाया, “आआअह्ह्ह्ह्ह सूरज… धीरे… ओह्ह्ह माँ… गांड फट जाएगी… पर रुकना मत… और तेज!” थप-थप-थप… मैं तेज झटके मार रहा था, भाभी चीख रही थीं, “हाँ… गांड मार… ऊउइईई… आह्ह्ह्ह!”

काउगर्ल और रिवर्स काउगर्ल में भी चढ़ीं, लंड को निचोड़-निचोड़कर रस पीती रहीं। जब मैं झड़ने वाला था तो बोलीं, “अंदर ही झाड़… मेरी चूत में पूरा माल भर दे!” मैंने जोरदार झटका मारा, गर्म वीर्य उनकी चूत में उड़ेल दिया, उसी पल भाभी भी झड़ गईं, उनका रस मेरे लंड और जांघों पर बहने लगा।

पर भाभी की प्यास अभी खत्म नहीं हुई थी। पूरी रात उन्होंने मुझे बार-बार बाँधा, कभी शॉवर के नीचे दीवार से, कभी किचन में स्लैब पर लिटाकर, हर बार नई पोजीशन में चुदवाया। सुबह तक मेरा लंड सूज गया था, पर भाभी की चूत अभी भी भूखी थी। उस रात के बाद जब भी भैया बाहर गए, भाभी मुझे बुलातीं और बंधक बनाकर रात भर चुदवातीं। हमारा ये गुप्त रिश्ता आज भी जारी है।

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