चाची की भतीजी की कुंवारी चूत को पूरी रात चोदा – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

kunwari seal todi sex story – Cream lagakar sex story: मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 25 साल की है. मेरी लंबाई 6 फीट है, शरीर मजबूत और आकर्षक है, शक्ल-सूरत भी ऐसी कि लड़कियां खुद नजरें झुकाती हैं. मैं शुरू से बाहर पढ़ाई करता रहा, इसलिए घर कम आता था. घर पर चाची की भतीजी प्रियंका रहती थी, उम्र करीब 20 साल. लंबाई कम थी, लेकिन फिगर 29-28-30 का—गोल-गोल बूब्स, पतली कमर और उभरी हुई गांड, मोहल्ले के लड़के दीवाने थे उसके.

घर आने के बाद मेरी नजरें हमेशा प्रियंका पर टिक जातीं. झाड़ू लगाते वक्त जब वो झुकती, उसके बूब्स लटकते दिखते, मन करता वहीं पकड़कर चोद डालूं, लेकिन रिश्ते का ख्याल रोक लेता. बचपन में खेली हुई ये मासूम लड़की अब इतनी सेक्सी हो गई थी कि उसकी खुशबू से ही मेरा लंड खड़ा हो जाता. गुनाह मीठा लगता, लेकिन रुक जाता.

कुछ दिन बाद मामा जी का स्वर्गवास हो गया. पूरा परिवार वहां गया, मुझे घर संभालने को रोक दिया. चाचा ने कहा, प्रियंका भी राहुल के साथ रुक जा, खाना बनाने के लिए. सब मुझे शरीफ समझते थे, कोई शक नहीं किया.

सारे घरवाले चले गए. दिन आराम से बीता. रात हुई, प्रियंका अपने कमरे में सोने गई, मैं अपने में. लेकिन नींद कहां आ रही थी. उसके बूब्स याद करके लंड सहलाने लगा, इतना मस्त हो गया कि दरवाजा खुलने की आवाज नहीं सुनाई दी. अचानक वो बोली, “राहुल, अकेले डर लग रहा है.” मैंने जल्दी लंड छुपाया, बोला, “यहां आकर लेट जाओ.” वो बोली, “नहीं, आप मेरे रूम में आ जाओ.”

वो कमर मतकाते आगे चली, मेरा लंड पहले से तना हुआ था. मन किया अभी दबोच लूं, लेकिन कंट्रोल किया. उसके कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया. शुरू में दूर-दूर रहे, एक कोने में वो, दूसरे में मैं. लेकिन बगल में जवान लड़की, घर सूना—नींद कैसे आती. उसकी सांसों की गर्माहट, हल्की खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी. मन बार-बार सोचता, उसकी चूत कैसी होगी—तंग, गर्म, कुंवारी.

सोचते-सोचते एक घंटा बीत गया. वो गहरी नींद में थी. अचानक करवट ली, मेरी तरफ सरक आई. अब पास थी, उसकी चूचियों का उभार साफ दिख रहा था. दिल धड़का, उंगलियां खुद-ब-खुद छूने को मचल रही थीं. सोचा, जो होगा देख लेंगे, नींद में लगा कह दूंगा. धीरे से उसकी तरफ खिसका, अब बदन छू रहे थे.

आंखें बंद कीं, हाथ उसके पेट पर रख दिया. उसकी त्वचा की गर्माहट हथेली में समा गई, जैसे कोई सुलगती आग हो. कुछ देर यूं ही रुका, उसकी सांसें सुनता रहा—धीमी, नियमित. फिर हाथ ऊपर सरकाया, सीने पर रखा. उसके दिल की धड़कन उंगलियों में महसूस हुई. कोई हलचल नहीं, वो सो रही थी. हल्के से दबाया, बूब्स की मुलायम कोमलता दब गई, निप्पल्स सख्त होकर उभर आए. मन में ख्याल दौड़ा—ये रिश्तेदार है, लेकिन ये बदन… बस चख लूं एक बार.

हिम्मत बढ़ी, हाथ टॉप के अंदर डाला. उसका नरम पेट सहलाया, नाभि के आसपास उंगलियां घुमाईं. वो थोड़ी हिली, जैसे संवेदनशील जगह छू गई हो. मेरी धड़कन तेज़, लेकिन रुका नहीं. हाथ ऊपर ले गया, चूचियों पर रखा. थोड़ी देर रुका, फिर धीरे-धीरे दबाने लगा. वो जाग चुकी थी शायद, लेकिन चुप थी—शायद डर से, शायद चाहत से.

अब हाथ टॉप से निकालकर पैंटी में सरकाया. जैसे ही उंगलियां उसकी चूत पर पड़ीं, गर्मी और हल्की नमी महसूस हुई—जैसे कोई मखमली गुफा छू ली हो. मैं पागल हो गया, उंगलियां क्लिट पर रगड़ने लगा, धीरे-धीरे घुमाने लगा. वो हल्के से कराही, “आह…” लेकिन आंखें बंद रखीं. मन में सोचा, ये जाग रही है, लेकिन रोक नहीं रही… इसे भी मजा आ रहा है.

वो कांपती आवाज में बोली, “राहुल जी… ये क्या कर रहे हो?” आवाज में विरोध कम, सिहरन ज्यादा. मैंने फुसफुसाया, “शश… प्रियंका, तेरी ये गर्म चूत मुझे पागल कर रही है, बस चखने दे.” उंगली चूत के होंठों के बीच डाली, अंदर की चिपचिपी दीवारें महसूस कीं—वो और गीली हो रही थी, रस टपकने लगा.

वो हल्के से कराही, “नहीं राहुल जी… आह… लेकिन अच्छा लग रहा है…” विरोध खत्म हो गया, बदन ढीला छोड़ दिया. मैं उठा, टॉप उतारा—रात में ब्रा नहीं पहनती थी, गोल-गोल बूब्स सामने आए. उन पर टूट पड़ा, चूसे, हल्के से काटा. वो सीत्कार उठी, “आउच… लेकिन मत रुको राहुल जी…” उसने मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए, जो मुझे और उकसाने लगे.

जोश में लोअर और पैंटी एक साथ उतार दी. नीचे से नंगी कर चूत तेज़ रगड़ने लगा. वो मदहोश होकर कराह रही थी, “आह्ह.. ह्ह.. आह्ह.. इह्ह..” कमरे में उसकी मादक खुशबू फैल गई. होंठ जोर-जोर से चूसने लगा, वो भी मेरे होंठ खींच रही थी.

सीधा चोदने का मन हुआ—उसकी हरकतों से साफ था, बहुत गर्म हो चुकी है. चूत से रस बह रहा था. अंडरवियर उतारा, टांगों के बीच गया, लंड चूत पर रगड़ा. वो सिहर उठी. लंड का टोपा मुंह पर सेट किया, जोर का धक्का मारा—पहले में सिर्फ टोपा अंदर गया.

क्रीम लगाई, दोबारा धक्का—थोड़ा और अंदर. प्रियंका चीखी, “आह्ह.. ह्ह्हीईई.. राहुल जी, मर गई! मम्मी… मेरी चूत फट गई… प्लीज बाहर निकालो, जल रहा है!” आंखों से आंसू बह रहे थे, चूत से खून की हल्की महक आई. मैं रुका, बूब्स दबाकर किस किया, दर्द कम होने दिया.

थोड़ी देर बाद फिर जोर का धक्का—पूरा लंड अंदर. वो फिर चीखने वाली थी, मैंने होंठ चूसकर चुप कराया. धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा. अब दर्द मजा में बदल रहा था, वो कराह रही थी, “आह.. इह्ह.. ओह्ह.. राहुल जी… धीरे… अब अच्छा लग रहा है… और अंदर डालो.”

टांगें उठाकर कंधों पर रखीं, जोर-जोर से चोदने लगा. चूत की तंगी लंड को निचोड़ रही थी. वो मदहोश होकर बोली, “आह्ह.. ह्ह.. ऊउइ.. ऊईई..” थोड़ी देर बाद लंड झड़ गया, सारा माल चूत में छोड़ दिया.

पूरी रात ऐसे ही चोदा, कई बार. सुबह वो हांफते हुए बोली, “राहुल जी, आज से मैं तेरी रांड हूं… जब मन करे चोद लेना, तेरे लंड की गुलाम बन गई.” अब घर आता तो प्रियंका को चोदकर ही जाता.

आपको कैसी लगी मेरी कहानी, कोई गलती हो तो माफ करना.

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