गिफ्ट के बदले भैया मुझे बिस्तर पर ले गए – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Bhai behan chudai sex story – Sagi behan sex story – Rakhi chudai sex story: मेरा नाम पल्लवी है। मैं एक प्राइवेट बैंक में काम करती हूं, अच्छी कमाई है, लेकिन अभी तक कुंवारी हूं। शादी की बातें घर से चलती रहती हैं, पर मैंने कभी किसी को इतना करीब नहीं आने दिया। मैं अपने शहर में किराए के फ्लैट में अकेली रहती हूं। मम्मी-पापा गोरखपुर में हैं, और मेरे बड़े भैया गुड़गांव में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर हैं। वो अकेले ही रहते हैं, बड़ा सा 2BHK फ्लैट लिया है, जहां से सिटी की चमक दिखती है।

पिछली बार रक्षाबंधन पर मैं बैंक की ट्रेनिंग में फंसी थी, राखी नहीं बांध पाई। भैया का फोन आया था, आवाज में नाराजगी साफ थी – “पल्लवी, तूने मेरे साथ ऐसा किया? राखी नहीं बांधी?” मैंने माफी मांगी, लेकिन मन में खटक रहा था। इस बार मैंने ठान लिया – सरप्राइज दूंगी। राखी से एक दिन पहले ही ट्रेन पकड़ी और सुबह-सुबह उनके फ्लैट पर पहुंच गई।

दरवाजा खुला तो भैया की आंखें फैल गईं। “पल्लवी! तू…?” वो खुशी से मेरे गले लग गए। जैसे ही मैं उनके सीने से लिपटी, मेरी भरी-भरी चूचियां उनके बदन से दब गईं। उस पल उनकी सांस रुक सी गई। मैंने महसूस किया – उनका हाथ मेरी कमर पर ज्यादा देर टिका रहा। फिर धीरे से पीठ पर सरका। मैं समझ गई, कुछ तो गड़बड़ है।

एक साल में मेरा बदन बहुत बदल गया था। चूचियां 36D हो गई थीं, टाइट और उभरी हुई। कमर पतली, गांड गोल और भारी। मैंने टाइट सलवार-सूट पहना था, जो मेरे कर्व्स को और हाईलाइट कर रहा था। भैया बार-बार मेरी तरफ देख रहे थे – कभी चूचियों की गहराई में, कभी गांड के उभार पर। उनकी नजरें भूखी थीं।

राखी का दिन आया। मैंने स्नान किया, लाल साड़ी पहनी, जिसमें मेरी कमर और क्लीवेज साफ दिख रहा था। पूजा की थाली तैयार की। भैया भी तैयार होकर बैठे थे। मैंने बड़े प्यार से उनकी कलाई पर राखी बांधी। “भैया, आप हमेशा मेरी रक्षा करना।” वो मुस्कुराए, “और तू भी मेरी।” फिर गिफ्ट मांगा।

उन्होंने जेब से पांच हजार निकाले, मेरे हाथ में रखे। “ये तेरा गिफ्ट। अब मेरा?” मैंने हंसकर कहा, “बोलो ना, क्या चाहिए? मैं भी तो कमाती हूं।” वो मेरी आंखों में देखकर बोले, “रात में मांगूंगा। वादा कर, मना नहीं करेगी।” मैंने हल्के से कहा, “ठीक है भैया, वादा।”

शाम हुई। बाहर से चाइनीज और बिरयानी मंगवाई। भैया ने चार बोतल बियर लाई थी। हम दोनों सोफे पर बैठ गए। पहली बोतल खुली, घूंट-घूंट पीते हुए पुरानी बातें होने लगीं। बचपन की शरारतें, स्कूल की यादें। लेकिन जैसे-जैसे बियर का असर बढ़ा, बातें बदलने लगीं। उनकी नजर मेरे होंठों पर, मेरी चूचियों की गहराई में, मेरी जांघों पर टिक रही थी। मैं भी नशे में ढीली पड़ रही थी।

तीसरी बोतल खत्म हुई तो वो करीब आए। उनकी सांस गर्म थी, beer की महक आ रही थी। “बहन, वादा याद है ना?” मैंने हंसकर कहा, “हां भैया, बोलो क्या चाहिए?” वो फुसफुसाए, “एक किस।” मैंने मजाक में कहा, “बस एक? ले लो।” मैंने गाल आगे कर दिया।

पर वो सीधे मेरे होंठों पर टूट पड़े। उनके गर्म, नरम होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। beer की मीठी-खट्टी महक मेरे मुंह में भर गई। पहले तो मैं चौंकी, हाथ से धक्का देने लगी – “भैया ये क्या?” लेकिन उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, मेरी जीभ से खेलने लगी। मैं टूट गई। मैंने उनके बाल पकड़े, जोर से चूसा। हमारी जीभें लड़ रही थीं, सांसें तेज, दिल धड़क रहे थे।

वो पीछे हटे, मुझे तड़पाया। फिर दोबारा टूट पड़े। “तेरे होंठ कितने रसीले हैं पल्लवी… मैं रोज सोचता हूं इनको चूसने का।” मैं हांफते हुए बोली, “भैया… ये गलत है… पर इतना अच्छा क्यों लग रहा?” उनके हाथ मेरी कमर पर, फिर धीरे-धीरे ऊपर चूचियों तक। कपड़ों के ऊपर से दबाया। मेरी निप्पल्स सख्त हो गईं। वो उंगलियों से रगड़ रहे थे। मेरी चूत में आग लग गई, गर्म रस टपकने लगा।

मैं कराह रही थी, “आह्ह… भैया… धीरे…” वो मुझे बिस्तर पर लिटाया। मेरी साड़ी खींची, ब्लाउज के हुक खोले। मेरी चूचियां बाहर आईं – बड़े, गोल, टाइट। वो दोनों हाथों से पकड़े, मसलने लगे। “कितनी भरी हुई हैं तेरी चुचियां… मैं पागल हो जाऊंगा।” फिर मुंह में लिया, निप्पल को चूसने लगे। जीभ चारों तरफ घुमा रहे थे, हल्के से काट रहे थे। मैं सिहर रही थी, कमर उठा रही थी।

फिर वो नीचे आए। मेरी पेटीकोट ऊपर किया, पैंटी पर हाथ फेरा। “गर्म हो रही है तेरी चूत… गीली है।” पैंटी खींचकर उतारी। मेरी चूत नंगी हो गई – गुलाबी, चिकनी, रस से चमक रही। वो घुटनों पर बैठे, पहले उंगलियों से सहलाया। क्लिट को रगड़ा। मैं चीखी, “आह्ह… भैया… मत रुको…” वो रुक गए, मुझे तड़पाया। फिर जीभ लगाई। चाटने लगे – लंबी-लंबी चाट, क्लिट को चूसते हुए। मेरी चूत की महक कमरे में फैल गई। गीले चटकने की आवाजें। मैं उनके सिर को दबा रही थी, “चूसो… और जोर से… मैं झड़ जाऊंगी!”

तीन-चार बार वो मुझे कगार पर ले गए, फिर रुक गए। आखिर में मैं चीखी, “भैया… अब बस… मुझे चोद दो!” वो मुस्कुराए, अपना पैंट उतारा। उनका लंड – मोटा, लंबा, 9 इंच का, नसों से फूला हुआ। मैं देखकर पागल हो गई। “भैया… इतना बड़ा…” मैंने हाथ में पकड़ा, सहलाया। फिर मुंह में लिया, चूसने लगी। उनकी सिसकारियां निकल रही थीं।

फिर वो मेरी टांगें फैलाईं। लंड को चूत पर रगड़ा। टिप से मेरा रस मिला। धीरे से धक्का दिया – आधा अंदर। दर्द हुआ, मैं चीखी, “आह्ह… फट जाएगी!” वो रुके, मेरी चूचियां मसलीं, होंठ चूसे। फिर जोरदार धक्का – पूरा लंड अंदर। मैं चीखी, पर दर्द में मिश्रित मजा था। वो धक्के मारने लगे – जोरदार, गहरे। हर धक्के में मेरी गांड उछल रही थी। चूत की चप-चप आवाज। उनके balls मेरी गांड पर थप-थप।

मैं कराह रही थी, “पेलो भैया… मेरी चूत फाड़ दो… और जोर से!” हमने पोजिशन बदली – डॉगी में, मैं ऊपर। वो मेरी गांड थपथपा रहे थे। करीब एक घंटे तक चुदाई चली। आखिर में वो तेज हुए, मेरी चूत में गरम माल उड़ेल दिया। हम थककर लेट गए।

रात में दोबारा नींद खुली। मेरी चूत सूजी हुई थी, हल्का खून। मैंने दिखाया तो उनकी आंखों में फिर वासना। लंड फिर खड़ा। दूसरी बार चोदा। सुबह नहाते वक्त शावर में भी – साबुन लगाते हुए ठंडी बोतल मेरी निप्पल्स पर रगड़ी, फिर लंड घुसा दिया।

तीन दिन तक यही हुआ – दिन में दो-तीन बार, रात में लंबी चुदाई। मेरे बदन पर उनके दांत के निशान, चूचियां दर्द कर रही थीं, जांघें कांप रही थीं, चूत सूजी हुई। पर जो मजा था, वो कमाल का।

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