ऑफिस की बेंच पर लिटाकर लौड़ा पेला मास्टर जी ने – Hindi Sex Stories – LustMasti1 min read

Bihari girl sex story – Master ji ne choda sex story – School office sex story: मेरा नाम मोना है। मैंने देर से पढ़ाई शुरू की थी, इसलिए हाई स्कूल में मेरी उम्र सबसे ज्यादा थी। बाकी लड़कियां छोटी थीं, लेकिन मैं पूरी तरह जवान हो चुकी थी। मेरी चूचियां बड़ी और भरी हुई थीं। मैं ब्रा नहीं पहनती थी, सिर्फ फ्रॉक पहनकर स्कूल जाती थी। फ्रॉक के पतले कपड़े से मेरी चूचियां हिलती रहती थीं और निप्पल साफ दिखाई देते थे। मास्टर जी की नजर हमेशा मेरे ऊपर रहती थी। वो दूर से ही मेरी चूचियों को घूरते रहते थे। मैं शर्मा कर नजरें झुका लेती थी और वहां से भाग जाती थी। वो पुकारते, “ओ मोना, इधर आ ना,” लेकिन मैं नहीं जाती क्योंकि उनकी आंखें मेरे स्तनों पर ही जमी रहती थीं।

जब मैं मैथ्स में गलती करती, तब भी वो मेरे पास आते और शाबाशी देते हुए मेरी पीठ सहलाते। उनकी हथेली गर्म लगती और धीरे-धीरे नीचे सरकती। अब वो मेरे ऊपर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गए थे। मौका मिलते ही वो अपना लंड पैंट के ऊपर से दबा लेते। मैं सब समझने लगी थी। मुझे भी उनकी ये नजरें अच्छी लगने लगी थीं। मैं भी उनकी केयर करने लगी थी।

एक दिन शनिवार था। मॉर्निंग क्लास थी। छुट्टी होते ही तेज बारिश शुरू हो गई। सब लोग भागकर घर चले गए। मैं भी घर पहुंच गई, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोलने की कोशिश की, याद आया कि घर की चाबी स्कूल में ही रह गई है। मां-पापा नानी के घर गए थे और चाबी मुझे दे गए थे। गांव का स्कूल था, मैं तुरंत वापस भागी। स्कूल पहुंची तो सब लोग जा चुके थे। सिर्फ मास्टर जी थे।

मैं जैसे ही अंदर घुसी, ऑफिस से मास्टर जी की आवाज आई, “मोना, क्या ढूंढ रही है?” मैंने कहा, “चाबी यहीं रह गई है।” वो बोले, “ओह, तुम्हारी चाबी है, आ यहां रखी है।” मैं ऑफिस में गई। बारिश में पूरी भीग चुकी थी। फ्रॉक मेरे बदन से चिपक गई थी। मेरी चूचियां पूरी तरह उभर आई थीं, निप्पल सख्त होकर साफ दिख रहे थे। मास्टर जी की नजर वहां अटक गई। मैंने खुद देखा तो शर्मा गई और हाथों से ढक लिया।

तभी बारिश और तेज हो गई। जोरदार आंधी चली। मास्टर जी मेरे पास आए और धीरे से मेरे हाथ हटा दिए। मैं खड़ी रही। उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। पहले उन्होंने अपनी उंगली से मेरे होठों को छुआ। हल्की सी सिहरन दौड़ गई। फिर उंगली नीचे सरका कर मेरी चूचियों पर फेर दी। मैं कांप उठी। उनकी उंगलियां फ्रॉक के गीले कपड़े पर मेरे निप्पल को रगड़ रही थीं। मुझे अच्छा लग रहा था। वो बोले, “कैसा लग रहा है?” मैं चुप रही।

फिर उन्होंने दोनों हाथों से मेरी चूचियां दबा दीं। गीले कपड़े के ऊपर से भी उनकी हथेलियां गर्म लग रही थीं। निप्पल को उंगलियों से मसलने लगे। मैं सांसें तेज लेने लगी। वो मेरे कानों में फुसफुसाए, “दर्द तो नहीं हो रहा?” मैंने धीरे से कहा, “नहीं।” फिर वो झुके और मेरे होठों को चूमने लगे। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई। मैंने भी जवाब देना शुरू किया। वो एक हाथ से मेरी चूची दबाते और दूसरे से मेरी कमर पकड़कर खुद से सटा रहे थे। मुझे उनका सख्त लंड मेरी जांघ पर महसूस हो रहा था।

मैं किसी तरह खुद को छुड़ाकर भागी। बाहर बारिश जोरों पर थी। बीस कदम भी नहीं चली थी कि वापस लौट आई। भीगते हुए बोली, “जो आप कर रहे हैं, किसी को बताएंगे नहीं ना?” वो मुस्कुराए और बोले, “अरे पगली, मैं क्यों बताऊंगा।” मैं खुद उनके हवाले हो गई।

जोरों की बारिश हो रही थी। उन्होंने मेरी गीली फ्रॉक ऊपर उठाई और सिर से निकाल दी। मैं सिर्फ पैंटी में रह गई। मेरी चूचियां खुली हवा में कांप रही थीं। निप्पल बारिश की ठंडक और उनकी गर्म नजर से और सख्त हो गए। वो मेरी चूचियों को मुंह से चूसने लगे। जीभ से निप्पल चाटते, हल्के से काटते। मेरे मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं। फिर नीचे आए, पैंटी उतार दी। मैं पूरी नंगी थी। उन्होंने मुझे बेंच पर लिटाया। मेरी टांगें फैलाईं और मुंह मेरी बूर पर लगा दिया।

उनकी गर्म जीभ मेरी चूत की फांक पर फिर रही थी। थूक और बारिश का पानी मिलकर फिसलन पैदा कर रहा था। वो क्लिटोरिस को चूस रहे थे, उंगली अंदर डालकर सहला रहे थे। मेरे बदन में गजब की सिहरन दौड़ रही थी। रोम-रोम खड़े हो गए। दांत खुद-ब-खुद पीसने लगे। मैंने खुद अपनी टांगें और चौड़ी कर दीं।

फिर उन्होंने अपने कपड़े उतारे। उनका मोटा लौड़ा बाहर आया। मेरी बूर पर रगड़ने लगे। बारिश की आवाज के बीच मेरी कराहें गूंज रही थीं। लौड़ा बार-बार फिसल जा रहा था। उन्होंने मेरी चूत में थूक लगाया, अपने लौड़े पर भी। फिर सिरा अंदर किया। मुझे तेज दर्द हुआ। मैं चीखी। वो रुके, मेरी चूचियां सहलाने लगे, होठ चूमने लगे। फिर जोर से धक्का दिया। लौड़ा अंदर घुस गया। मैं कराह उठी।

धीरे-धीरे वो आगे-पीछे करने लगे। दर्द कम हुआ और मजा आने लगा। उनकी गर्म सांसें मेरे गले पर लग रही थीं। लौड़ा मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। करीब पांच मिनट बाद वो झड़ गए। सारा माल मेरे पेट पर गिरा।

जब मैं कपड़े पहनने लगी तो देखा मेरी बूर से खून निकल रहा था। मैं डर गई। मास्टर जी बोले, “कोई बात नहीं, पहली बार ऐसा होता है। परदे टूटते हैं।” मैं कपड़े पहनी और भीगते हुए घर चली गई। बाद में मास्टर जी ने कई बार समझाया कि अब दर्द नहीं होगा, लेकिन मुझे डर लगता था कि फिर खून न निकले। इसलिए मैंने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया।

ये मेरी वो याद है जो आज भी मुझे गुदगुदाती है।

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